शोएब अख्तर ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी कर कहा, ”9/11 के बाद 2001 में मुसलमानों ने बहुत नस्लवाद सहा है. अगर 60 बंदों ने आतंकवाद में हिस्सा लिया तो 160 मिलियन लोगों ने इसे सहा. उस घटना को इंटरनेशनल मीडिया ने इतना बढ़ा-चढ़ा के पेश किया कि 160 मिलियन लोगों को उन्होंने आतंकवादी बना दिया. इस पर इतनी बात की और इतनी रिपोर्टिंग की कि पूरी दुनिया में मुसलमानों को ऐसा बनाकर पेश किया कि दुनिया में इनसे बढ़ा आतंकवादी कोई है ही नहीं.”
उन्होंने कहा, ”फुटबॉल में मैंने देखा, ब्लैक कम्युनिटी के साथ मैंने देखा, कोई उन पर केला फेंक रहा है, कोई उनको जानवरों के नाम से बुला रहा है. हर चीज अल्लाह की बनाई हुई है. हर इंसान अल्लाह का बनाया हुआ है. वो हिंदू है, वो मुसलमान है, वो सिख है, वो ब्लैक है, व्हाइट है, वह ब्राउन है, वह चाइनीज है, जैपनीज है कोई भी है… वह अल्लाह का बनाया हुआ है. आप उसकी बेइज्जती नहीं कर सकते. मेरे साथ भी हुआ. कई देशों में हम लोग गए. तो हमसे पूछा जाता था कि कहां से हो और जब हम कहते थे कि पाकिस्तान तो वो लोग कहते थे- ओह ओसामा बिन लादेन का देश.”अख्तर ने कहा, ”क्रिकेट मैदान में गए तो हमें आतंकवादी के नाम से बुलाया गया. 2002 में मुझे वाक्या याद है. मैं देश का नाम नहीं लेता. स्टेडियम में तानें कसे गए. हमारे दोस्तों को बहुत कुछ कहा गया. हम वहां यतीम बच्चों को खाना दे रहे थे. हमें जो पैसे मिल रहे थे, हम उस एक कम्युनिटी को दे रहे थे, बिना कोई भेदभाव के और यह सब हम इसलिए नहीं कर रहे थे कि हमें कुछ चाहिए था या हमारा नाम अच्छा बन जाए. हमें सिर्फ अल्लाह से इनाम चाहिए होता है. हमारा इमान सिर्फ अल्लाह पर ही होना चाहिए और किसी चीज पर नहीं.”
उन्होंने कहा, ”मोहम्मद सिराज के साथ जो हुआ. वह बहुत दुर्भाग्यशाली था. ऑस्ट्रेलिया रेसिस्ट देश नहीं है. मैं वहां बहुत बार गया हूं. हालांकि, वहां कुछ लोग ऐसे हैं, जो ऐसी हरकत करते हैं. 99 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया मुझे प्यार करता है, लेकिन सिर्फ एक प्रतिशत की वजह से नाम खराब हो जाता है.”
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शोएब अख्तर ने कहा, ”बीसीसीआई को इस घटना पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए. बीसीसीआई और पीसीबी को इस बात पर एक साथ आना चाहिए और पूरी दुनिया को कहना चाहिए कि हम यह सब बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसके साथ ही जिसने रेसिस्ट कमेंट किया है, उसकी हर ग्राउंड से एंट्री बैन करनी चाहिए. फिर उसे जेल में डालना चाहिए. ताकि सबक मिले पूरी दुनिया में कि खेलों की दुनिया में ऐसा दोबारा ना हो. आप किसी हिंदू को गाली नहीं दे सकते. आप किसी मुसलमान को गाली नहीं दे सकते. आप किसी के मजहब को गाली नहीं दे सकते.”
पूर्व पेसर ने कहा, ”मैं 1997 से हिंदुस्तान जा रहा हूं. आपके 33 करोड़ भगवान हैं. मैंने एक दफा भी गलत बात नहीं कही. वो इसलिए कि किसी की भावनाएं आहत होंगी. मैंने आक्रामक क्रिकेट खेला, पाकिस्तान ने 90 के दशक में आक्रामक क्रिकेट खेला, लेकिन कभी किसी की भावनाएं आहत नहीं की. व्यक्तिगत, धर्म, जात, रंग या वर्ग को लेकर कभी टिप्पणी नहीं की.”
अंत में सिराज को सलाह देते हुए शोएब अख्तर ने कहा, ” हम सभी ने कभी न कभी नस्लवाद सहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सिर झुका लें. अपना सिर ऊंचा करो, बॉल पर गुस्सा निकालो. तुम्हारे पिता ऊपर से तुम्हें देख रहे हैं. तगड़ी बॉलिंग करो, सिर फाड़ो, दो चार पसलियां तोड़ो. गुस्सा निकालो बॉल के ऊपर.”