हनुमा विहारी की बचपन की फोटो, जिसमें वह माता पिता के साथ हैं (फोटो क्रेडिट: एपी/ हनुमा विहारी इंस्टाग्राम )
दर्द में भी बल्लेबाजी कर भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों सिडनी टेस्ट में हार से बचाने वाले हनुमा विहारी (Hanuma Vihari) ने 12 साल की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था.
- News18Hindi
- Last Updated:
January 12, 2021, 5:51 PM IST
टीम पर हार का संकट मंडरा रहा था. ऐसे में अश्विन और विहारी ने दिन का खेल समाप्त होने तक बल्लेबाजी कर मैच ड्रॉ करवा दिया. हनुमा 23 रन और अश्विन 39 रन पर नाबाद लौटे. इसके बाद चारों तरफ विहारी के जज्बे की तारीफ हो रही है. दरअसल बल्लेबाजी के दौरान वह हैमस्ट्रिंग की चोट से जूझ रहे थे. इसके बावजूद उन्होंने 161 गेंदों का सामना किया और विकेट पर जमे रहे.
करीब 5 दिन तक लापता रहे थे विहारी
उनकी चोट इस कदर गंभीर हो गई थी कि मैच खत्म होने के बाद ड्रेसिंग रूम में लौटते समय भी वह बल्ले का सहारा लेकर चल रहे थे. विहारी के इस जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है. दर्द सहकर भी वह टीम के लिए लड़े. दर्द सहकर भी लड़ने की यही ताकत उन्होंने 12 साल की उम्र में भी दिखाई थी. जब पिता के निधन से टूटने के बाद भी वह टीम को मैच जिताने की कोशिश करते हुए पाए गए थे.यह भी पढ़ें :
दरअसल जब विहारी 12 साल के थे तो उस समय उनके पिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. पिता की मौत से विहारी इस कदर टूट गए थे कि वो करीब 5 दिन तक लापता रहे थे. उसके बाद उनकी मां को पता चला कि वह स्कूल की टीम को मैच जिता रहे थे. उस मैच में उन्होंने 82 रन बनाए थे.