असम चुनाव में बीजेपी को हराने की रणनीति के लिए कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ इकाई के नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी.
Explainer: असम में इसी साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) हैं. कांग्रेस ने इसके लिए सबसे ज्यादा भरोसा छ्त्तीसगढ़ पर किया है. वह चाहती है कि जिस तरह रणनीति बनाकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीनी थी, उसी मॉडल को अपनाकर असम में भाजपा को शिकस्त दी जाए.
- News18Hindi
- Last Updated:
February 4, 2021, 12:38 PM IST
बता दें कि असम में इसी साल अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं. कांग्रेस ने चुनाव में फतह हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा भरोसा छ्त्तीसगढ़ पर किया है. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और चुनाव में असम के राज्य प्रभारी विकास उपाध्याय बनाए गए हैं, जो छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव भी हैं, उन्होंने पहले से ही अपनी टीम के साथ असम में डेरा डाल रखा है. अब बघेल ने अपने तीन सबसे भरोसेमंद सलाहकार विनोद वर्मा, रुचिर गर्ग और राजेश तिवारी को सिपहसालार के रूप में बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के काम में लगा दिया है.
ये हैं वो खास सलाहकार
बता दें कि इनमें से विनोद वर्मा देश के उन नामचीन संजीदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो बीबीसी से लेकर विभिन्न मीडिया हाउसेस में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में एक तत्कालीन मंत्री का सेक्स स्कैण्डल उजागर करने पर फंस गए थे, इस बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड में ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था. इसी प्रकार रुचिर गर्ग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ रखने वाले राज्य के वरिष्ठ और नामचीन पत्रकार हैं, जिनकी विशेष रूप से नक्सलियों पर रिपोर्टिंग देश भर में काफी चर्चित रहीं हैं. बीते विधानसभा चुनाव में राज्य की रमन सिंह सरकार के पराजय की रणनीति बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, अब यह दोनों सत्तारूढ़ कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास राजनीतिक और मीडिया सलाहकार हैं.
शुरू हो चुका है प्रशिक्षण का काम
भूपेश के इन सलाहकारों की टीम ने अपने दो साथियों सुरेन्द्र शर्मा और अरुण भद्रा के साथ असम में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को निशाने पर लेने के लिए ब्लॉक से बूथ स्तर तक प्रशिक्षण देने का काम शुरू भी कर दिया है. यह टीम असम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह सिखा रही है कि किस तरह सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की नाकामियों को जनता के सामने लाना है और उन्हें यह बताना है कि वह घोषणापत्र (Election Manifesto) के अनुरूप वादे पूरे नहीं कर सकी है. हर विधानसभा क्षेत्र की उन समस्याओं को रेखांकित और प्रचारित कैसे करना है, जिन्हें सरकार खत्म नहीं कर पाई है. असम के कार्यकर्ताओं को बताया जा रहा है कि वह चुनाव में प्रचार के परंपरागत तरीकों से लेकर सोशल मीडिया और प्रेस माध्यमों का कैसे इस्तेमाल करें. कांग्रेस समर्थक वोटों को सहेजे रखने के साथ हर व्यक्ति से संपर्क कैसे रखें. आचार संहिता लगने से पहले वाल राइटिंग (Wall Writing) तक का काम पूरा कर लिया जाना चाहिए, ताकि चुनाव तक कांग्रेस का संदेश लोगों को अभी से पहुंच जाए.
भूपेश बघेल जल्द खुद भी संभालेंगे मोर्चा
रायपुर कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि स्वयं प्रियंका गांधी असम के चुनाव पर पैनी नजर रखे हुए हैं. उन्हीं के कहने पर मुख्यमंत्री बघेल ने इस टीम को जिम्मेदारी सौंपी है और खुद भी असम के कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने और उनमें जान फूंकने प्रशिक्षण शिविरों में शिरकत करने वाले हैं. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)