रक्षा मंत्री की तारीफ का असर: 734 पंचायतों में बनेंगे 10-10 खेत तालाब, 36 हजार एकड़ भूमि होगी सिंचित, जलस्तर बढ़ेगा

रक्षा मंत्री की तारीफ का असर: 734 पंचायतों में बनेंगे 10-10 खेत तालाब, 36 हजार एकड़ भूमि होगी सिंचित, जलस्तर बढ़ेगा


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सागर3 घंटे पहलेलेखक: संदीप तिवारी

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फाइल फोटो

  • योजना सफल हुई तो 7.92 करोड़ क्यूविक मीटर वर्षा जल जमीन में जाएगा

जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में 10-10 खेत तालाब बनाए जाएंगे। यह काम इसी माह से शुरू होगा और 15 जून तक पूरा भी कर लिया जाएगा। एक खेत तालाब से औसतन 5 एकड़ जमीन सिंचित होती है। इस हिसाब से देखा जाए तो जिले की 734 ग्राम पंचायतों में 7340 खेत तालाब बनेंगे। इससे सीधे तौर पर 36 हजार 700 एकड़ जमीन सिंचित होगी। इसका सीधा असर खेती की पैदावार पर पड़ेगा। साथ ही महत्वपूर्ण फायदा जल स्तर बढ़ने का होगा। 30×30 मीटर के एक आदर्श बखेत तालाब में औसतन 3600 क्यूविक मीटर पानी आता है। तो 7340 तालाबों में 2.64 करोड़ क्यूविक मीटर वर्षा जल का संग्रहण होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक तालाब वर्षाकाल में अपनी क्षमता से 3 गुना पानी जमीन में पहुंचाता है। इस प्रकार इनसे 7 करोड़ 92 लाख क्यूविक मीटर पानी जमीन में जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्र में साल भर में ही 5 से 7 फीट तक जल स्तर बढ़ेगा। जबकि आने वाले 4 से 5 साल में बढ़ा बदलाव होगा। दरअसल, जिले में यह नवाचार होने की मुख्य वजह है जिले की पिपरिया गोपाल पंचायत। जिसे रिकॉर्ड 83 खेत तालाब बनने के चलते आए सकारात्मक बदलाव के कारण भारत सरकार से राष्ट्रीय जलशक्ति अवार्ड मिला है।

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न सिर्फ जलाभिषेकम कार्यक्रम में इस पंचायत की तारीफ की बल्कि अपने ट्विटर अकाउंट पर भी इसको शेयर किया है। यही वजह है कि जिला पंचायत सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले ने अब हर पंचायत में मनरेगा के तहत हितग्राहीमूलक खेत तालाब बनवाने की कार्ययोजना बनाई है। सभी जनपद सीईओ को निर्देश दिए हैं कि अपनी जनपद अंतर्गत प्रत्येक पंचायत से 10-10 हितग्राहियों का चयन करें, ताकि तेजी से इनका निर्माण कार्य शुरू हो सके और 15 जून तक सब कम्प्लीट हो जाएं।

मनरेगा के तहत बनाए जाते हैं खेत तालाब
मनरेगा के तहत 92000 से लेकर 3.32 लाख रुपए तक की राशि का प्रावधान है। 80% राशि मजदूरी में खर्च होती है। औसतन 2 लाख भी प्रत्येक तालाब का खर्च आया तो करीब 146 करोड़ रुपए की राशि इनके निर्माण पर व्यय होगी। 98 करोड़ सीधे मजदूरों के खातों में जाएंगे। इससे करीब 51 लाख मानव दिवस सृजित होंगे।

जिले में 13 सालों में पंचायत विभाग ने 23275 कार्यों से 78700 एकड़ जमीन सिंचित की

एक्सपर्ट व्यू- गांवों से तालाब खत्म हुए, इसीलिए जलसंकट आया
भूजलविद प्रो. एलपी चौरसिया ने बताया तालाब सिंचाई के काम तो आते ही हैं, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का काम भी करते हैं। जल स्तर ऊपर लाने में ये बहुत मददगार होते हैं। एक साथ 7 हजार से अधिक तालाब बनेंगे तो आसपास का 5 से 7 फीट तक जल स्तर बढ़ेगा। कुओं का जल स्तर बढ़ेगा और 100 से 150 फीट वाले जो ट्यूबवेल जल्दी सूख जाते थे, वो भी नहीं सूखेंगे।

भूगर्भशास्त्री बठिंडा विवि के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने बताया गांवों में जलसंकट का मुख्य कारण पुराने तालाबों पर अतिक्रमण और उनका खत्म होना है। एक तालाब अपनी क्षमता से 3 गुना पानी जमीन के अंदर पहुंचाता है। खेत तालाब बनने से आने वाले 4-5 सालों में जल स्तर व्यापक स्तर पर ऊपर आ जाएगा। किसानों को भी प्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलेगा।



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