नर्मदा जयंती: उज्जैन के रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ पुरोहितों ने की शिप्रा की आरती, मनाई नर्मदा जयंती

नर्मदा जयंती: उज्जैन के रामघाट पर मंत्रोच्चार के साथ पुरोहितों ने की शिप्रा की आरती, मनाई नर्मदा जयंती


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उज्जैनएक मिनट पहले

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शिप्रा के रामघाट पर पुरोहितों ने नर्मदा जयंती मनाई

उज्जैन के मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पर शुक्रवार को नर्मदा जयंती मनाई गई। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ मां नर्मदा का पूजन अर्चन किया। इसके बाद माता शिप्रा को चुनरी चढ़ाकर महाआरती की गई। पुरोहितों ने विश्व कल्याण की कामना की। पं. राजेश जोशी ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार मां नर्मदा की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने से हुई थी। देवताओं के पाप धोने के लिए भगवान शिव ने मां नर्मदा को उत्पन्न किया था. सच्चे मन से नर्मदा नदी में स्नान किया जाए तो व्यक्ति के समस्त पाप धुल जाते हैं. हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अमरकंटक से मां नर्मदा का उद्भव हुआ था। उन्होंने बताया कि मां शिप्रा में सभी नदियों के गुप्त रूप से समावेश है इसलिए यहां पर स्नान करने से नर्मदा नदी में स्नान का पुण्य मिलता है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त से पहले स्नान करना शुभ होता है। इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।



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