चोरी की कार ओएलएक्स में बेचते थे, गाजियाबाद में पकड़े गए. प्रतीकात्मक तस्वीर
NCR News: OLX पर धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है. गाजियाबाद पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर को पकड़ा है.
सीओ (साइबर सेल, गाजियाबाद) अभय कुमार मिश्र ने बताया कि कविनगर निवासी अमन ने पिछले सप्ताह कार मैकेनिक के यहां से कार चोरी का मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने छानबीन शुरू की तो सीसीवीटी फुटेज में अमरोहा निवासी प्रशांत त्यागी कार को ले जाते दिखा. सीसीटीवी फुटेज देखते ही कार मालिक ने बताया कि यह कार तो उसी से ही खरीदी थी, जो चोरी कर ले जा रहा था. उसी के साथ मैकेनिक के यहां छोड़कर आए थे. पुलिस ने प्रशांत से सख्ती से पूछताछ की तो उसने फर्जीवाड़े की पूरी कहानी पुलिस को बताई.
तैयार करते थे फर्जी पेपर
आरोपी प्रशांत त्यागी ने बताया कि उसके पास चोरी की वैगनआर कार है. वह अपनी कार जैसी रंग और मॉडल नंबर को तालाशता था. जैसे ही रास्ते में कोई कार दिखती, उसका नंबर नोट कर लेता. परिवहन एप पर उस नंबर को डालकर कार की पूरी जानकारी ले लेता था और अपने साथी की फोटो लगाकर फर्जी आधार कार्ड बना लेता था. इसी तरह स्कैन कर आरसी पर भी यही नंबर डालकर कलर प्रिंट निकाल लेता था. इसके बाद वास्तविक कीमत से आधे दाम में बेचने के लिए उसे OLX पर डाल देता था. अमन ने बताया कि ओएलएक्स पर कार देखकर दिए गए नंबर पर कॉल की थी. जांच में पता चला कि यह नंबर भी फर्जी आईडी देकर खरीदा गया था. 1.40 लाख रुपये में कार का सौदा हुआ, जबकि कार की वास्तविक कीमत 2.80 लाख के करीब थी.कार ठीक करवाने के लिए खुद ही मैकेनिक के यहां छोड़ा
प्रशांत ने अमन को रेस्त्रां में बुलाया. वहां अपने दूसरे साथी से मिलवाता और उसे कार का मालिक बताया था. यह भी बताता था कि यह कार हाल ही में खरीदी है. उसका एक सेल लेटर भी दिखाता था. अमन ने ऐप पर नंबर डालकर चेक किया तो कार मालिक का नाम व अन्य पहचान वही दिखी, जिससे प्रशांत ने अमन को मिलाया था. अमन को भरोसा हो गया और इसी आधार पर अपने नाम से एक सेल लेटर बनवाकर पैसे दे दिए थे. साथ ही प्रशांत ने बताया कि कार में कुछ कमियां हैं, इन्हें वही ठीक करा देगा. इस पर जो खर्च आएगा, वह प्रशांत देगा. मैकेनिक के पास जाकर अमन ने कार खड़ी कर दी. इसकी दूसरी चाबी प्रशांत के पास थी. अमन के इधर-उधर होने होते ही मौका मिलते ही कार लेकर प्रशांत फरार हो गया. इसे किसी और को बेचने की फिराक में था, तभी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
पूर्व मालिक के यहां से चोरी की थी कार
जांच में पता चला कि कार उसकी नहीं, बल्कि नोएडा निवासी ट्रांसपोर्टर निर्मल की है. प्रशांत पूर्व में निर्मल का ट्रक चलाता था. प्रशांत का भाई मुनेंद्र फर्जी दस्तावेज तैयार कर चोरी के वाहनों को बेचने के आरोप में दो साल से जेल में बंद है. पुलिस पूछताछ में प्रशांत ने बताया कि लाकडाउन में नौकरी छूटने के बाद से वह परेशान था, इसीलिए फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया. आरोपी ने पूर्व मालिक निर्मल की कार एक माह पहले से चुराई थी, जिसे बेच रहा था.