Mahashivratri 2021: उज्जैन में उमड़े श्रद्धालु, रातभर इंतजार के बाद किए महाकाल के दर्शन

Mahashivratri 2021: उज्जैन में उमड़े श्रद्धालु, रातभर इंतजार के बाद किए महाकाल के दर्शन


उज्जैन में महाशिवरात्रि के मौके पर धूम मची हुई है.

Mahashivratri 2021: भगवान महाकाल के पट तड़के 2.30 बजे खुले. भस्मार्ती सुबह 4.30 बजे संपन्न हुई. श्री महाकालेश्वर का सतत जलधारा से अभिषेक हुआ.

उज्जैन. उज्जैन में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं. श्रद्धालुओं की भीड़ रात भर से मंदिर के बाहर जमा हो गई थी. तड़के 2.30 बजे भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट खुले और भस्मार्ती सुबह 4.30 बजे संपन्न हुई.  श्री महाकालेश्वर का सतत जलधारा से अभिषेक हुआ. दोपहर 12 बजे गर्भगृह में उज्जैन तहसील की ओर से पूजा होगी. शाम 4 बजे होलकर एवं सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन होगा. संध्या आरती शाम 5.30 बजे होगी. कोटेश्वर भगवान का पूजन रात्रि 8 बजे से 10 बजे पूजन होगा.

इस बीच बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी सुबह 6.30 बजे महाकाल के दर्शन करने पहुंचे. गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने श्रद्धालुओं के संख्या सीमित रखी है. जिन लोगों ने केवल ऑनलाइन प्री बुकिंग की है वही महाकाल मंदिर के दर्शन कर पा रहे हैं. इसके अलावा श्रद्धालु घर बैठे भी महाकाल के लाइव दर्शन कर सकेंगे. महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क पहनकर ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली है.

12 मार्च को दोपहर में होगी भस्मार्ती

गौरतलब है कि महाशिवरात्रि के अगले दिन 12 मार्च को प्रात: 4 बजे से सेहरा चढ़ना और प्रात: 6 बजे सेहरा आरती होगी. दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक भस्मार्ती होगी. दोपहर 2.30 बजे से 3 बजे तक भोग आरती और फिर ब्राम्ह्ण भोज होगा. संध्या पूजन शाम 5 बजे से 5.45 बजे भगवान को जल चढ़ना बंद होगा. शाम 6.30 बजे से 7.15 बजे तक संध्याआरती और रात्रि 10.30 बजे शयन आरती के बाद पट मंगल हो जायेंगे. इस दौरान लगातार 44 घ्ंटे  बाबा श्री महाकालेश्वर के पट दर्शन हेतु खुले  रहेंगे.शिव धारण करेंगे सवा मन का पुष्प मुकुट

श्री महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष में एक ही बार भगवान महाकाल को सवा मन का पुष्प मुकुट धारण कराया जाता है. साथ ही, महाशिवरात्रि पर्व पर लगातार भगवान शिव के दर्शनों के लिए 44 घंटे गर्भगृह के पट खुले रहते हैं महाशिवरात्रि पर एक ऐसा अवसर आता है जब महाकाल सोते नहीं हैं. इस पर्व पर भगवान महाकाल सवा मन का फूलों से सजा मुकुट धारण करते हैं. साल में एक बार दिन में 12 बजे भस्मार्ती होती है.








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