1000 साल पुराना है खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर: चावल के दाने जितना हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार, 9 फीट का शिवलिंग, 6 फीट की जलहरी, मणि के ऊपर बना है मंदिर

1000 साल पुराना है खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर: चावल के दाने जितना हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार, 9 फीट का शिवलिंग, 6 फीट की जलहरी, मणि के ऊपर बना है मंदिर


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खजुराहाे3 घंटे पहले

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महाशिवरात्री पर्व पर, मकर संक्रांति पर, अमावस्या पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

  • शिवलिंग इतना ऊंचा है कि जलहरी के ऊपर चढ़कर करना पड़ता है अभिषेक

खजुराहाे में स्थित 1000 साल पुराना भगवान मतंगेश्वर मंदिर बुंदेलखंड क्षेत्र में आस्था का केंद्र है। पश्चिम मंदिर समूह के बाजू में स्थित विशाल मंदिर के अंदर विशाल शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के गर्भग्रह में करीब 6 फीट ऊंची जलहरी के ऊपर 9 फीट ऊंचा शिवलिंग है, शिवलिंग जितना ऊपर है उतने ही आकार में नीचे हैं।

किवदंती है कि यह शिवलिंग हर वर्ष एक चावल के दाने के बराबर ऊपर बढ़ता है।

किवदंती है कि यह शिवलिंग हर वर्ष एक चावल के दाने के बराबर ऊपर बढ़ता है।

मंदिर का निर्माण एक हजार साल पहले चंदेल राजाओं ने 9वीं शताब्दी में कराया गया था। शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं काे 6 फीट ऊंची जलहरी पर चढ़ना पड़ता है, इसके बाद ही शिवलिंग को जलाभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्री पर्व पर, मकर संक्रांति पर, अमावस्या पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के तहत मंदिर में विशेष तैयारियां चल रही है। शिव पार्वती का विवाह के लिए नगर में बारात निकाली जाएगी। विवाह की सभी रस्में मतंगेश्वर मंदिर में ही पूरी हाेंगी।

शिव मंदिर निर्माण की प्रचलित कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण एक विशेष मणि रत्न के ऊपर कराया गया है। जो इसके चमत्कारिक होने का कारण है। यह मणि स्वयं भगवान शिव ने सम्राट युधिष्ठिर को प्रदान की थी। जो कि हर मनोकामना पूरी करती थी। बाद में संन्यास धारण करते समय युधिष्ठिर ने इसे मतंग ऋषि को दान में दे दिया था।

मतंग ऋषि के पास से यह मणि बुंदेलखंड के चंदले राजा हर्षवर्मन के पास आई। जिन्होंने लोक कल्याण के लिए इस मणि को धरती के नीचे दबाकर उसी स्थान पर मतंगेश्वर मंदिर का निर्माण कराया। सबकी मनोकामना पूरी करने वाली इस मणि के कारण ही यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन की इच्छा पूरी होती है। मतंग ऋषि के कारण इस मंदिर का नाम मतंगेश्वर पड़ा।

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