रेलवे ने कहा-लोअर बर्थ के आवंटन में सबसे पहले प्राथमिकता वीवीआईपी को दी जाती है
जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव ने ग्वालियर से जबलपुर के बीच अपने ऑफिशियल विजिट के दौरान अपने अनुभवों को लेकर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने ट्रेन (train) में रिजर्वेशन (reservation) व्यवस्था में कई खामियां गिनाई थीं.
लोअर बर्थ के आरक्षण के मुद्दे पर हाई कोर्ट के जस्टिस संजय यादव और जस्टिस अतुल श्रीधरण की डबल बेंच ने कहा, गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता देने के लिए सिर्फ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य कारणों के कारण उनके लिए मिडिल बर्थ या अपर बर्थ उचित नहीं होगी.ऐसे में गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की बजाए उनको आरक्षण में वरीयता दी जाए. इस आग्रह के साथ डिवीजन बेंच ने पत्र याचिका का निराकरण करते हुए रेलवे से वरीयता क्रम में बदलाव के लिए कहा है.
ये है मसलाजस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव ने ग्वालियर से जबलपुर के बीच अपने ऑफिशियल विजिट के दौरान अपने अनुभवों को लेकर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर कई खामियां गिनाई थीं. मकसद यही था कि रेलवे आरक्षण में व्यवस्था और सुधार करने के लिए कुछ नये और ठोस कदम उठाए जा सकें.इसमें जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव के अनुभव पर अधिवक्ता आदित्य संघी ने अपनी सहमति जताते हुए एक अर्जी दायर की थी. याचिका की सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से जवाब दिया गया था कि लोअर बर्थ के आवंटन में सबसे पहले प्राथमिकता वीवीआईपी को दी जाती है. इसमें मंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी शामिल रहते हैं. वीवीआईपी के बाद गर्भवती महिलाओं और फिर सीनियर सिटीजन को प्राथमिकता दी जाती है. रेलवे का यह भी कहना था कि हर व्यक्ति को लोअर बर्थ चाहिए होती है. लेकिन सबसे पहले कोशिश यही की जाती है कि सीनियर सिटीजन को पहले प्राथमिक्ता दी जाए.