बता दें कि मध्यप्रदेश में ही मंगलवार को 817 मरीज मिले, जिनमें भोपाल में 235 नए संक्रमित पाए गए थे. ट्रेंड देखते हुए पूरा यकीन है कि संक्रमण का ये आंकड़ा लगातार बढ़ने वाला है. सरकार ने शहर में धारा 144 लगा रखी है, जलसे-जुलूसों पर रोक के साथ होली के कार्यक्रम और जुलूस पर भी रोक लगा दी है. रात 10बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू घोषित कर दिया है. सर्वाधिक सुरक्षा के घेरे में चलने वाला विधानसभा सत्र तक 10 दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया, लेकिन भोपाल में हुनर हाट, भोजपाल उत्सव मेला चल रहे हैं, जहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते बिना मास्क के रोज हजारों लोग कोराना बम की तरह गोलगप्पे खाते, मौजमस्ती करते घूम रहे हैं.
अस्पतालों के आईसीयू भर गए
भोपाल हो या इंदौर, दोनों शहरों में अस्पतालों के आईसीयू कोरोना के मरीजों से फिर फुल हो चुके है, आइसोलेशन सेंटर दोबारा भरने लगे हैं, अगर कोरोना के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी की यही रफ्तार रही तो हालात और गंभीर होने लगेंगे. पिछले साल तो भोपाल के कई मैरिज गार्डन और होटलों को आइसोलेशन सेंटर में तब्दील कर दिया गया था, लेकिन पिछली बार का बकाया 3 करोड़ रुपए सरकार ने चुकाया नहीं है, लिहाजा वह घाटा सहकर इन्हें आइसोलेशन सेंटर में तब्दील करने के लिए तैयार नहीं है.नाइट कर्फ्यू को लेकर सवाल
बीते साल इसी मार्च के महीने में टोटल लाकडाउन के साथ ही नाइट कर्फ्यू लगाया गया था, संक्रमण कम होने पर बीच के महीनों की राहत के बाद फिर से लाकडाउनन जैसा दौर लौटते दिख रहा है. अभी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में नाइट कर्फ्यू लगाया गया है, अन्य 10 शहर भी राडार पर हैं. लेकिन लगातार यह सवाल उठता रहा है कि आखिर रात में कर्फ्यू लगाने का क्या फायदा है? क्या नाइट कर्फ्यू वाकई असरदार है? वास्तव में दरअसल, नाइट कर्फ्यू में सरकार अपने अनुसार टाइमिंग तय कर इसे लगाती है, जिसमें लोगों की रात में आवाजाही पर रोक लगाई जाती है, ताकि रात में लोग जमा न हो सकें. इससे फायदा यह होता है कि लोग लंबे समय तक बाजारों में नहीं रहते हैं और अपने आवश्यक कार्य के लिए बाहर जाते हैं और जो रात में घूमने या जमा होने आदत पर नियंत्रण लगता है. और इक्ट्ठे होने की आदत है, उस पर नियंत्रण लगता है. सरकार भी मानती है कि नाइट कर्फ्यू से कोरोना पर लगाम कसती है और केस में कमी आती है, लेकिन हकीकत पर अगर आप गौर करें कि यह उपाय तो कोरोना संक्रमण रोकने की दिशा में एक कदम के रूप में तो ठीक है, लेकिन दिन में जो बाजारों में बेइंतहा भीड़ जुट रही है, उसे थामने के लिए क्या सरकार के पास कोई इलाज है.
लोग क्या सोचते हैं
नाइट कर्फ्यू को लेकर सोशल मीडिया और आपसी चर्चाओं को देखें तो इस पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है.
1—नाइट कर्फ्यू से कोरोना पर अंशतः ही अंकुश लगेगा. लोगों को मास्क पहनने के लिए जुर्माना लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग के लिए कड़ाई करनी होगी. यह कर्फ्यू भी तभी कारगर रहेगा, जब लोग लापरवाही न करते हुए स्वयं अपना और परिजनों का ध्यान रखेंगे.
2- जब तक ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग और ट्रेसिंग नहीं होगी, तब तक कोरोना पर नियंत्रण संभव नहीं. बता दें कि यही बात बुधवार को पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सात कोरोना को लेकर बुलाई आपात बैठक में कही. उन्होंने मुख्यमंत्रियों को ट्रिपल टी यानी टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट पर जोर देने का फार्मूला दिया और साथ ही कहा कि गांवों को बचाना जरूरी है.
3–नाइट कर्फ्यू से कुछ बात तो बनती है, लेकिन उसमें ढिलाई का पूरा फायदा नहीं मिलता. दिन में रास्तों, चौराहों, बाजारों में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर कड़ाई करनी होगी. बाजारों में दुकानदारों को मास्क लगाने वालों को ही सामान देने के लिए सख्ती करनी होगी.
4-नाइट कर्फ्यू जरूरी है, क्योंकि शादी, पार्टियों, पार्कों, होटलों में होने वाली भीड़ पर इससे अंकुश लगेगा.
5- कोरोना की यह दूसरी लहर लोगों की लापरवाही का नतीजा है, क्योंकि लोग करीब-करीब साल भर इसकी मार सहने के बाद भी गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं. पूरी सावधानी रखने के साथ यह निडरता होती तो अच्छी बात होती. बेहतर होगा कि लोग पहले जैसी ही सावधानी और तत्परता दिखाएं, तभी नाइट कर्फ्यू का कोई फायदा होगा, अन्यथा नहीं.
- नाइट कर्फ्यू जरूरी और एक सार्थक कदम है, क्योंकि इससे रात के समय बाजारों में जुटने वाली भीड़ पर लगाम लगेगी. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भीड़ कभी भी दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी की अनिवार्यता का पालन नहीं करती. (ये लेखक के निजी विचार हैं)