शासकीय एमजेएस कॉलेज में हुई संगोष्ठी: पानी का सर्वाधिक उपयोग घर में होता है, जल बचाने की पहल भी यहीं से करना होगी: डॉ. शर्मा

शासकीय एमजेएस कॉलेज में हुई संगोष्ठी: पानी का सर्वाधिक उपयोग घर में होता है, जल बचाने की पहल भी यहीं से करना होगी: डॉ. शर्मा


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भिंड2 घंटे पहले

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  • जल दिवस पर हुए कई कार्यक्रम, लोगों से जीवनदायी पानी व्यर्थ न बहाने का किया आह्वान
  • वक्ता बोले- पानी का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए अच्छा नहीं, समय रहते संभल जाएं

पानी प्रकृति का अनमोल उपहार है। इसे संजोकर रखने और व्यर्थ न बहाने का कर्तव्य सभी का है। पानी का सर्वाधिक उपयोग घर में ही करते हैं इसलिए इसके बचाने की पहल भी घर से ही करना होगी। अगर हम अंधाधुंध दोहन करते रहे तो भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। यह बात जल दिवस पर शासकीय एमजेएस कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रोफेसर डॉ. आरए शर्मा ने कही। प्रोफेसर डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि जल जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य आवश्यक तत्व है इसी कारण जल की महत्ता का वर्णन सभी धर्मों में मिलता है। भारतीय संस्कृति में इसे जीवन का आधार निरूपित किया गया है। शपथ ब्राह्मण में जल को प्राण बताया गया है तथा कहा गया है कि सभी देव जल में प्रतिष्ठित हैं पुराणों में जलाशयों की महत्ता उनके अवधि विशेष तक जल की उपस्थिति के अनुसार प्रतिपादित की गई है।

काॅलेज परिसर की नालियों का पानी संग्रहित करने की बनाई योजना
जल दिवस पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा महाविद्यालय के परिसर में सूखे कुएं में जल संग्रहित करने की योजना पर काम शुरू किया गया। इसके तहत कुएं के आसपास की साफ- सफाई की गई। कुएं में नालियों के माध्यम से परिसर से पानी ले जाया जाएगा।

इसके साथ ही लोगों को जल संरक्षण की जानकारी दी गई। इस मौके पर आदित्य दुबे, अंशुल हरिऔध, सुशील कुमार, हेमंत कुमार, प्रवेश इंदौरिया, सुजीत हरिऔध, काजल भदौरिया, काजल चौहान, ऋषि कुमार, किरण राजावत, शिवम गजरौलिया आदि उपस्थित रहे।
पौधे जल चक्र बनाए रखने का सबसे बड़े स्त्रोत, इसलिए पौधरोपण भी करें: प्रो. अली
हम फाउंडेशन द्वारा आयोजित संगोष्ठी में प्रो. इकबाल अली ने कहा कि पौधे जल चक्र का सबसे बड़ा स्त्रोत हैं इसलिए हमें अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए। जल स्रोतों की साफ- सफाई करने का दायित्व भी हमारा है। गाड़ियों की धुलाई में हम पानी का सबसे अधिक दुरुपयोग करते हैं। इसलिए गाड़ियों को बाल्टी में पानी लेकर धोएं।

बर्तन और कपड़ों को धोने में भी पानी का को बचा सकते हैं। नहाने में फव्वारा का प्रयोग न करें। इस प्रकार से हम बूंद- बूंद कर बड़ी मात्रा में जल बचा सकते हैं। इस मौके प्रो. नितिन दीक्षित, हरेकृष्ण शर्मा आदि उपस्थित थे।

महिला वर्ग को घर से करें पहल: डॉ. कुशवाह
शासकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के विशेष शिविर शुभारंभ अवसर पर कन्या पूजन किया गया। वहीं कुसुमबाई जैन डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मिथलेश कुशवाह ने कहा कि महिला वर्ग को घरों से जल बचाने की पहल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा जल का महत्व भली भांति जानते थे।

कुओं, बावड़ियों और तालाबाें का पानी पीते थे। अब तो मोटरों के माध्यम से पानी का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। यह भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुधीर दीक्षित ने जल बचाने का आह्वान करने के साथ ही कोरोना गाइड लाइन का पालन करने की भी बात कही। संचालन इकाई की प्रभारी डॉ. रेणु सिंह ने किया। डॉ. आरएस भदौरिया, डॉ. राजकुमार शर्मा, प्रो. राहुल उपाध्याय, प्रो. हेमंत यादव, सुधीर जोशी आदि उपस्थित थे।

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