रास्तों काे बांस-बल्ली से सील किया: ग्रामीणों ने अपनी गाइड लाइन खुद बनाई, पालन भी किया, नतीजा- अब तक गांव में किसी को कोरोना छू तक नहीं पाया

रास्तों काे बांस-बल्ली से सील किया: ग्रामीणों ने अपनी गाइड लाइन खुद बनाई, पालन भी किया, नतीजा- अब तक गांव में किसी को कोरोना छू तक नहीं पाया


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Ujjain
  • The Villagers Created Their Own Guide Lines, Followed Them, And The Result No One Has Ever Touched The Corona In The Village.

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

उज्जैन2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
  • दो गज की दूरी अनिवार्य, गमछा बनाया मास्क

जिले की करीब 21 लाख आबादी में से 66 फीसदी लोग अंचलों में निवासरत हैं। शहर में कोरोना से बचाव के लिए जहां कड़ी गाइडलाइन, पाबंदियों व कार्रवाई के बावजूद रोजाना 25 से 50 तक केस सामने आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिले के कई ऐसे गांव भी हैं जिनको अब तक कोरोना छू भी नहीं पाया है। क्योंकि इन ग्रामीणों ने अपनी गाइड खुद बनाई। कड़ाई से पालन भी किया। खानपान और आवागमन में भी संयम बरता। नतीजा जहां शहर में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी को चिंता में डाल रखा है वहीं ये ग्रामीण अब भी बिंदास होकर जीवन यापन कर रहे हैं।

लिंबादित : पूरे गांव को दो बार सैनिटाइज किया, शहर तो दूर पड़ोसी गांवों में भी जाना बंद किया

यह है ग्राम लिंबादित की तस्वीर। माकड़ौन तहसील के ढाई हजार आबादी वाले इस गांव में कोई भी कोरोना पॉजिटिव नहीं आया है। इसलिए कि कोरोना की पहली लहर से ही ग्रामीणों ने खासी सावधानी बरती। सरपंच प्रतिनिधि गोकुल सिंह यादव कहते हैं कि दो बार पूरे गांव को सेनीटाइज किया गया। गांव के प्रमुख रास्तों को बांस-बल्ली से सील कर दिया था। घर-घर जाकर मास्क बांटे।

वसूली पटेल बाबूलाल यादव कहते है गांव में बैनर तक लगाए ताकि बाहरी लोगों का आना प्रतिबंधित है। यह सब देख ग्रामीणों को एहसास हुआ कि बीमारी खतरनाक है। लिहाजा यहां के ग्रामीणों ने शहरों में व नजदीकी गांवों में जाना तक बंद रखा। बार-बार हाथ धोने पर भी जोर रहा। बड़ाें को देख बच्चे भी एहतियात बरतने लगे। शिक्षक मुकेश यादव कहते हैं कि काेरोना की दूसरी लहर के चलते पुन: ग्रामीण सावधान है। बेवजह शहरों व हाट-बाजारों में जाना टालने लगे हैं।

सामगी : ग्रामीणों ने अपने नियम खुद बनाए, दो गज दूरी का पालन किया, खासकर अनजान लोगों से, गांव की सीमा सील कर दी

उज्जैन में जब लगातार कोरोना के केस मिल रहे थे तब मक्सी-शाजापुर हाइवे स्थित तराना तहसील के ग्राम सामगी के लोगों ने इससे बचने के लिए अपने नियम खुद बनाए। करीब ढाई हजार आबादी वाले इस गांव में पहली लहर के वक्त ही ग्रामीणों ने गांव की सीमाओं को रस्सी व बांस-बल्लियों से सील कर दिया था। मुंह पर गमछा व रूमाल लपेटे गांव के युवक बारी-बारी से पहरेदारी भी करने लगे थे कि कोई अनजान गांव में प्रवेश तो नहीं कर रहा है। ग्रामीण भागीरथ चौहान कहते हैं संक्रमण से बचने के लिए एक-दूसरे से दो गज की दूरी बनाए रखी। खासकर अनजान लोगों से। इसके अलावा शहरों में व भीड़ वाले स्थानों पर जाना भी लगभग बंद कर दिया था। बच्चों को भी एहतियात बरतना सीखाया।

हरनावदा : शहर का चाय-नाश्ता तक बंद किया, परिवारों में खासकर वृद्धजनों की ज्यादा देखभाल करने लगे,

उज्जैन-देवास रोड स्थित ग्राम हरनावदा बेहद ही छोटा है। आबादी केवल 600 के लगभग। गांव का मुख्य रास्ता नरवर से लगा है तो कोरोना काल में सबसे पहले ग्रामीणों ने इस रास्ते पर कोरोना की रोकथाम की। रास्ते पर टोल नाके की तरह बास-बल्ली के देशी बैरियर लगाए। शहरी व आसपास के कासमपुर, खोकरिया व देवर आदि के ग्रामीणों को आवागमन प्रतिबंधित कर दिया था। गांव के किसान नेता दशरथ सिंह पंड्या बताते है बहुत जरूरी व चिकित्सीय कार्य वालों को गांवों के रास्ते से आने-जाने दिया, बाकी को नहीं। शहर का चाय-नाश्ता व खाद्य वस्तुएं भी सभी ने लाना व खाना बंद कर दी।

खबरें और भी हैं…



Source link