जेपी में कोरोना मरीज की मौत: परिजनों को बिना पीपीई किट के सौंप दिया शव, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को वापस रखवाया गया,डॉक्टर बोले शव परिजनों तक कैसे पहुंचा पता लगा रहे

जेपी में कोरोना मरीज की मौत: परिजनों को बिना पीपीई किट के सौंप दिया शव, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को वापस रखवाया गया,डॉक्टर बोले शव परिजनों तक कैसे पहुंचा पता लगा रहे


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • Dead Body Handed Over To Families Without PPE Kit, Family Members Accused Of Death Due To Dislocation, Doctors Said How To Reach The Dead Bodies

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

भोपाल14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

जेपी अस्पताल में कोविड मरीज की बाॅडी बिना कोविड प्रोटोकॉल के परिजनों को सौंप दी। मामले सामने आया तो अस्पताल प्रबंधन कह रहा है कि परिजनों के पास शव कैसे पहुंचा पता लगा रहे है।

  • यह भी गंभीर मामला- डॉक्टर बोले जयप्रकाश अस्पताल में गंभीर मरीज को लाया गया था, रैफरल फॉर्म बनाया गया, लेकिन हमीदिया में बेड नहीं होने रैफर नहीं कर सके
  • परिजनों का अस्पताल में ठीक से इलाज न मिलने पर मौत होने का आरोप

राजधानी के जयप्रकाश जिला अस्पताल में कोरोना मरीज को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने गुरुवार सुबह पहले तो बिना कोविड प्रोटोकॉल के शव परिजनों को सौंप दिया। फिर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को अस्पताल में रखवाया गया। इसका एक वीडियो भी वायरल हो गया। जिसमें अस्पताल का स्टाफ वाहन से शव को बाहर निकाल रहा है। उन्होंने पीपीई किट भी नहीं पहनी है। इस मामले में मृतक महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मरीजों को इलाज और देखभाल में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए है। वहीं, जय प्रकाश चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि परिजनों के आरोप बेबुनियाद है। वह शव लेकर जबरन जा रहे थे। वह कोविड वार्ड में कैसे पहुंचे और शव कैसे बाहर निकाला इसकी जांच कर रहे है।

भानपुर निवासी सुनील मौर्य ने बताया कि उनकी मां को बुखार आ रहा था। वह 28 मार्च को मां रामवती 45 को लेकर जयप्रकाश अस्पताल आए। सुनील ने आरोप लगाया कि पहले तो डॉक्टरों ने बिना कोरोना जांच के उनकी मां को कोरोना बता दिया और कोविड वॉर्ड में भर्ती करा दिया। वार्ड में उनका ना तो ठीक से इलाज किया जा रहा था ना ही देखभाल। परिजन ही उनको खाना और दवा दे रहे थे। सुनील ने बताया कि बुधवार की रात वह मां को खाना खिलाकर बाहर आकर सो गए। सुबह 6 बजे मुझे फोन पर बताया कि मेरी मां की तबीयत गंभीर हो गई है। मेरी मां की हालत कुछ देर पहले तक ठीक थी। मैंने जाकर देखा तो थोड़ी पल्स चल रही थी। मैं दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए अपनी मां को लेकर बाहर आ गया, लेकिन गाड़ी से उनको बाहर उतार लिया। सुनील ने आरोप लगाया कि रात में वार्ड में सब सो जाते है। मरीजों की देखभाल करने वालों कोई नहीं होता।

4-4 हजार के इंजेक्शन बुलाए

सुनील ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उसकी मां के जल्दी ठीक होने के लिए इंजेक्शन बुलाए गए। उनकी कीमत 4-4 हजार रुपए थी। इसके संबंध में अस्पताल ने कागज पर लिखा कि वह इंजेक्शन उनकी मर्जी से लगवा रहे है। तीन इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद भी उनकी मां ठीक नहीं हुई।

हमीदिया में बेड होने से रैफर नहीं कर सकें

“मरीज को गंभीर हालत में 28 मार्च को अस्पताल लाया गया था। दूसरे दिन उसका रैफरल फाॅर्म भी भरा गया, लेकिन दूसरी जगह बेड उपलब्ध नहीं थे। इसलिए अस्पताल में ही वेंटिलेटर पर रखा गया। मरीज को डायबटीज थी। उसके दोनों फेफड़े में संक्रमण फैल चुका था। ड्यूटी डॉक्टर ने बताया था कि हमीदिया में बेड नहीं होने से रैफर नहीं कर सके। कल रात के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। ”।– डॉ. वीके दुबे,डॉक्टर, जयप्रकाश अस्पताल

डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल।

? कोविड मरीज के शव ले जाने का क्या मामला है?

  • परिजन जबरदस्ती शव लेकर अस्पताल से लेकर जा रहे थे। हमने उनको एफएआरई करने की चेतावनी दी। इसके बाद रोका गया।

? परिजनों तक कोविड मरीज का शव कैसे पहुंचा?

  • इस मामले का पता लगा रहे है। उनके परिजनों तक शव कैसे पहुंचा। ? आरोप है कि परिजन खुद खाना और दवाई देते है। कोई देखभाल नहीं होती?
  • यह आरोप बेबुनियाद है। हमारे यहां पर सीसीटीवी लगे है। परिजनों को अंदर जाने की इजाजत ही नहीं है।

खबरें और भी हैं…



Source link