- Hindi News
- Local
- Mp
- Gwalior
- The Prison Guard Kept Sleeping, Ran Away With Handcuffs, Did Not Know Why A Dummy Was Made On The Bed, Wife, Mother Did Not Even Know
Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप
ग्वालियर8 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
जेएएच में जहां बंदी का उपचार चल रहा था वहां इसी हथकड़ी को खोलकर वह भाग गया, हथकड़ी का एक सिरा बेड से बंधा हुआ है
- बंदी मोहन ने रात में की थी खून की उल्टी
- हालत बेहद गंभीर फिर भी चकमा देकर भाग गया
- ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी को किया सस्पेंड
दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा एक बंदी JAH के जेल वार्ड से हथकड़ी सरका कर भाग गया है। घटना शनिवार तड़के 4 बजे की है। बाहर पहरा दे रहे जेल प्रहरी की गहरी नींद का फायदा उठाकर बंदी भागा है। पास ही सो रही पत्नी और मां को भी उसके भागने की भनक नहीं लगी। पकड़ा न जाए इसके लिए बिस्तर पर कंबल और तकिया की डमी बना दी, जिससे लगे कि वह सो रहा है। घटना का पता सुबह प्रहरी की नींद खुलने पर चला। यही बंदी ठीक 3 महीने पहले जेएएच के इसी वार्ड से कड़ी सरका कर फरार हुआ था। तब भी पत्नी पास सो रही थी और बाहर दो प्रहरी गहरी नींद में थे। एक ही जगह से एक ही तरह से दो बार बंदी के भागने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जेएएच से भागने वाला दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा बंदी मोहन अहिरवार
सागर निवासी 37 वर्षीय मोहन पुत्र कल्लू अहिरवार को दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सजा हुई थी। उसे टीबी की गंभीर बीमारी है। अभी वह ग्वालियर केन्द्रीय जेल में बंद था। गंभीर हालत को देखते हुए उसे कुछ दिन पहले JAH लाया गया था। जहां उसको हर दिन खून की उल्टी हो रही थी। शुक्रवार रात 12 से शनिवार सुबह 6 बजे तक जेल प्रहरी पंकज अग्रवाल जेएएच के बंदी वार्ड के बाहर प्रहरा दे रहा था। अंदर बंदी मोहन भर्ती था। देखभाल के लिए पास ही बंदी की मां और पत्नी भी सो रही थीं। रात 3 बजे तक जेल प्रहरी ने मोहन को सोता हुआ देखा था। इसके बाद प्रहरी की झपकी लग गई। इसी समय बंदी मोहन ने अपने हाथ पर बंधी हथकड़ी को सरकाया और भाग गया। पकड़ा न जाए इसके लिए बिस्तर पर तकिया और चादर की डमी बना गया। घटना का पता सुबह उस समय लगा जब जेल प्रहरी पंकज की नींद खुली। बंदी के भाग जाने की खबर से हंगामा खड़ा हो गया। जेल अधीक्षक मनोज साहू मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जेल प्रहरी पंकज को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। साथ ही सिर्फ एक ही प्रहरी की ड्यूटी लगाने पर अफसरों को फटकार लगाई है।
पत्नी–मां भी रह गई सोती
बंदी की बीमारी के चलते उसकी मां, पत्नी और एक अन्य रिश्तेदार भी अस्पताल में थे और जिस समय मोहन भागा, वह भी कुछ दूरी पर उसी वार्ड में सो रहे थे। बंदी के भागने का पता उनको भी नहीं चला। पुलिस उनसे भी पूछताछ कर रही है। साथ ही बंदी मोहन की तलाश में नाकाबंदी कर दी गई है।
एक ही तरह से दो बार भागा, इत्तेफाक या साजिश
बंदी मोहन पुत्र कल्लू अहिरवार पहली बार नहीं भागा है। ठीक तीन महीने पहले 29 दिसंबर को वह इसी तरह भाग था। 18 दिसंबर को उसे बीमारी के चलते उपचार के लिए भोपाल से ग्वालियर जेल भेजा गया था। 29 दिसंबर को पत्नी और दो जेल प्रहरी को बाहर सोता छोड़कर वह इसी तरह कड़ी सरकाकर फरार हो गया था। एक महीने पहले ही उसे वापस पकड़ा गया है। उसके तीन महीने में दो बार एक ही तरह से भागना सिर्फ इत्तेफाक है या साजिश यह सवाल तो खड़ा होता है।
बंदी के भागने के बाद केन्द्रीय जेल के अफसरों को फटकार लगाते जेल अधीक्षक मनोज साहू
अपहरण और दुष्कर्म का आरोपी है मोहन
जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि सागर का रहने वाला मोहन दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सजा काट रहा है। उसकी तबियत खराब हुई तो उसे सागर से भोपाल ट्रांसफर किया गया था। हालत बिगड़ने पर भोपाल से ग्वालियर लाया गया था। यहां पर खून की उल्टी करने पर उसे जेएएच में भर्ती कराया था। यहां पर जेल प्रहरियों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा था।