On the day of Rakshabandhan, 5 brothers were surrounded by single sister | साेनकच्छ के एक परिवार के चार लाेगाें की माैत, रक्षाबंधन के दिन 5 भाइयाें काे छाेड़ गई एकलाैती बहन

On the day of Rakshabandhan, 5 brothers were surrounded by single sister | साेनकच्छ के एक परिवार के चार लाेगाें की माैत, रक्षाबंधन के दिन 5 भाइयाें काे छाेड़ गई एकलाैती बहन


देवास16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

परिवार काे छोटे भाई हितेंद्र मिजाजी ने मुखाग्नि दी।

  • 5 भाइयों को राखी बांधने के लिए जबलपुर के लिए ट्रक में बैठ रवाना हुई थी।
  • पूजा का मायका जबलपुर के दीनदयाल चौराहे के पास

नरसिंहपुर में ट्रक हादसे में साेनकच्छ के बजाज परिवार के चार लाेगाें की माैत हाे गई। वीरेंद्र की पत्नी पूजा सोनकच्छ से अपने 5 भाइयों को राखी बांधने के लिए जबलपुर के लिए ट्रक में बैठ रवाना हुई थी। उस क्या पता था कि रास्ते में काल उसके पूरे परिवार को निगल जाएगा। पूजा का मायका जबलपुर के दीनदयाल चौराहे के पास है। भाइयों को जब बहन मौत की खबर लगी रो-रोकर हाल-बेहाल हाे गया। कहने लगे कौन सा उनसे गुनाह हो गया था, जो उनकी एकलाैती बहन अपने परिवार सहित राखी के दिन हमें छोड़कर कर चली गई।

वीरेंद्र 2 से 3 गादी निकाल दे यार ट्रक जा रहा है। यह बात मृतक वीरु ने ट्रक में बैठने से पहले अपने एक टेंट व्यवसायी मित्र के यहां जाकर कही थी। वीरू से दुकानदार मित्र ने कहा, थारे कई जरुरत है यार क्यों परेशान करे। फिर वीरू ने कहा- आज आखिरी बार दे दे। आज के बाद तुझसे नहीं मांगूगा। मृतक वीरू द्वारा कही यह बात आज मित्र के साथ परिजन व समाज में सिर्फ याद बनकर रह गई है।

एक साथ उठी चार अर्थी

परिवार काे छोटे भाई हितेंद्र मिजाजी ने मुखाग्नि दी। पुलिस के दो जवानों ने शवयात्रा मार्ग को खाली करवाया। सड़क पर खड़ी गाड़ियों को भी रोड़ से नीचे लगवाया गया। इधर जिसने भी यह दृश्य देखा उन्होंने रोड़ के किनारे खड़े होकर अश्रुपुरित श्रद्धांजलि दी। नगर में यह पहली बार हुआ जब एक साथ 4 लोगों की अर्थी निकली। श्मशान घाट में दो शवों को जलाने की व्यवस्था है। इसलिए दो शवों को अलग से जलाया गया।

वीरेंद्र को एक वर्ष की उम्र से पाला था मामा ने- वीरेंद्र अपने मामा राधेश्याम और गोपाल बजाज के पास ही बड़े हुए। वे एक वर्ष के थे तभी से मामा राधेश्याम उन्हे सीहोर से अपनी बहन के पास लेकर सोनकच्छ अा गए थे। पालन-पोषण से लेकर पढ़ाई रोजगार और शादी भी मामा ने ही करवाई थी।

0



Source link