देवी मंदिरों का ऑनलाइन दर्शन: 52 शक्तिपीठों में शामिल है शहर की बड़ी खेरमाई मंदिर, कोरोना संकट दूर करने स्थापित किया गया है 101 ज्योतिष कलश

देवी मंदिरों का ऑनलाइन दर्शन: 52 शक्तिपीठों में शामिल है शहर की बड़ी खेरमाई मंदिर, कोरोना संकट दूर करने स्थापित किया गया है 101 ज्योतिष कलश


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Jabalpur
  • 52 Shaktipeeths Include The City’s Large Khermai Temple, Corona Crisis Has Been Established To Remove 101 Astrology Urns

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जबलपुर26 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

बड़ी खेरमाई मंदिर।

  • नौ दिन होंगे विशेष पूजा पाठ, प्रशासन ने ऑनलाइन दर्शन के लिए लिंक https://tinyurl.com/JbpDeviDarshan जारी किए

नवरात्र के साथ ही जिले में स्थापित शक्तिपीठों में विशेष पूजन-अर्चन शुरू हो गए हैं। लोगों ने अपने घरों में कलश स्थापित किए हैं। इस बार देवी मंदिरों में कोरोना को देखते हुए प्रवेश की अनुमति नहीं है। कुछ मंदिरों में दूर से दर्शन की सुविधा दी गई है। तो अधिकतर में ऑनलाइन दर्शन का विकल्प दिया गया है। 52 शक्तिपीठों में शामिल शहर की बड़ी खेरमाई मंदिर में इस बार कोरोना महामारी से मुक्ति दिलाने के लिए 101 कलश स्थापित किए गए हैं।

जबलपुर के बड़ी खेरमाई मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं का दूर से ही मां का दर्शन हो रहा है। इस बार मंदिर में कोरोना महामारी से बचाने के लिए 101 ज्योतिष कलश स्थापित किया गया है। इसके लिए पीतल के कलश मुरादबाद (यूपी) से मंगवाए गए हैं। मंदिर परिसर में लगने वाली दुकानें बंद रखी गई। मेला भी नहीं भरेगा। बिना मास्क मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति किसी को नहीं दी जा रही है।
आनॅलाइन दर्शन की व्यवस्था
जिला प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए ऑनलाइन दर्शन की सुविधा प्रदान की है। इसके लिए प्रशासन की वेबसाइट jabalpur.nic.in के मुख्य पृष्ठ में दिए हुए लिंक पर या लिंक https://tinyurl.com/JbpDeviDarshan पर क्लिक दर्शन कर सकते हैं। ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था में तेवर स्थित त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर, सदर स्थित काली माता मंदिर, बड़ी खेरमाई माता मंदिर, हनुमानताल और बंगाली क्लब परिसर स्थित काली माता मंदिर को जोड़ा गया है।

52 शक्तिपीठों में शामिल बड़ी खेरमाई मंदिर में संग्रामशाह ने स्थापित की थी प्रतिमा
मां दुर्गा की 52 शक्तिपीठों में प्रमुख गुप्त शक्तिपीठ भानतलैया स्थित बड़ी खेरमाई मंदिर का लिखित इतिहास 800 वर्ष पुराना है। कल्चुरी काल से पहले भी शाक्त मत के तांत्रिक और ऋषि-मुनि शिला रूपी मां की पूजा करते थे। यह मंदिर क्षेत्रीय आदिवासियों के लिए काफी प्रसिद्ध है और यहां तंत्रसाधना भी होता था।

मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी के मुताबिक इस प्राचीन प्रतिमा वर्तमान प्रतिमा के नीचे भाग में विराजमान है। गोंड राजा मदनशाह मुगल सेनाओं से परास्त होकर यहां खेरमाई मां की शिला के पास बैठ गए। पूजा के बाद उनमें नया शक्ति संचार हुआ और राजा ने मुगल सेना पर आक्रमण कर उन्हें परास्त किया। 500 वर्ष पूर्व गोंड राजा संग्रामशाह ने मढ़िया की स्थापना की थी।

नौ दिन मां का विभिन्न स्वरूपों के अनुसार श्रृंगार किया जाता है
वर्तमान में इस मंदिर का निर्माण सोमनाथ के कारीगरों द्वारा बनाया गया है। मंदिर में जवारा विसर्जन की परंपरा भी वर्ष 1652 की चैत्र नवरात्र में शुरू हुई थी। इस बार जवारा विसर्जन का 369वां वर्ष है। इस मंदिर में 27 कैमरों से निगरानी होती है। नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी और नवमी को रात में मातारानी की महाआरती होती है। यहां मां का नौ दिन विभिन्न स्वरूपों के अनुसार श्रृंगार किया जाता है।

तेवर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर।

तेवर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर।

11वीं शताब्दी में बना था त्रिपुर सुंदरी मंदिर
भेड़ाघाट रोड पर तेवर स्थित ये मंदिर काफी प्राचीन है। इसकी देख-रेख प्रशासन करता है। यहां लोग मन्नत मांगने के तौर पर नारियल बांधते हैं। जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो वे नारियल खोलने आते हैं। कहा जाता है कि इसका निर्माण राजा कर्ण ने करवाया था। यहां पर एक शिलालेख मौजूद है। जिसके आधार पर इस बात की पुष्टि होती है। 11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के बारे में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं वहीं इसके स्वयं-भू होने के सम्बन्ध में भी कई तरह की खोज की जा चुकी है।
1985 में मूर्ति आई सबके सामने
मंदिर में स्थापित मूर्ति के संबंध में कहा जाता है कि 1985 के पूर्व इस स्थान पर एक किला विद्यमान था, जिसके अंदर यह प्राचीन मूर्ति थी। वहां पास में ही एक गड़रिया रहता था जो मूर्ति के पास ही अपनी बकरियों को बांधा करता था। मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर था। बाद में धीरे-धीरे यहां कुछ अन्य विद्वानों का आना हुआ और मंदिर का विकास कार्य किया गया। अब भी इस स्थान पर मंदिर के ही समीप उस गड़रिया की झोपड़ी है।

ज्योतिष डॉ. बाल गोविंद शास्त्री कहते हैं कि मंदिर में स्थापित मूर्ति का अति महत्व है। यहां स्थापित शिलालेख में ही त्रिपुर सुंदरी भी लिखा हुआ था। 1990 के बाद मंदिर के विकास ने तेजी पकड़ी और अब हजारों की संख्या में यहां लोगों का आना होता है।

खबरें और भी हैं…



Source link