कोविड जांच ना ही वैक्सीनेशन, कैसे जीतेंगे जंग ?: भिंड के स्वास्थ्य केंद्र आलमपुर में कोरोना संदिग्ध को नहीं मिल रही प्राथमिक सेवाएं, फीवर क्लीनिक पर नहीं होती कोविड जांच, बिना उपचार के ही होम क्वारंटाइन हो रहे मरीज

कोविड जांच ना ही वैक्सीनेशन, कैसे जीतेंगे जंग ?: भिंड के स्वास्थ्य केंद्र आलमपुर में कोरोना संदिग्ध को नहीं मिल रही प्राथमिक सेवाएं, फीवर क्लीनिक पर नहीं होती कोविड जांच, बिना उपचार के ही होम क्वारंटाइन हो रहे मरीज


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भिंड4 घंटे पहले

आलमपुर के फीवर क्लीनिक पर दो दिन से लगा ताला।

  • लैब टेक्नीशियन जाते ही स्वास्थ्य केंद्र के फीवर क्लीनिक पर जड़ जाता ताला।

भिंड जिले के आलमपुर नगर में एक बुजुर्ग दंपति पिछले दो दिनों से कोरोना की जांच के लिए सरकारी अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की जांच के लिए फीवर क्लीनिक बनाई गई है। लेकिन लैब टेक्नीशियन एक ही है। यह लैब टेक्नीशियन को आलमपुर के अलावा, दबोह स्वास्थ्य केंद्र और लहार सिविल अस्पताल में सेवाएं देनी हाेती है। इसलिए कम ही उपस्थित रहता है। ऐसे में जो लोग बीमार हैं और जिनके अंदर कोराेना के लक्षण है। ऐसे लोगों की यहां समय पर कोविड जांच नहीं हो पा रही है।

कोरोना महामारी के दौरान भिंड जिले का स्वास्थ्य विभाग समुचित उपचार व्यवस्था व जांच व्यवस्था के दावे ठोकते आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के इन दावों की हकीकत जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में देखने को मिल सकती है। आलमपुर कस्बे में रहने वाले बुजुर्ग कैलाश नारायण तिवारी पिछले दो दिन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आलमपुर के चक्कर काट रहे थे। यहां अस्पताल पहुंचकर वे और उनकी पत्नी कोविड जांच कराना चाहती है। 50 साल से अधिक की बुजुर्ग अवस्था में ये दोनों ही अस्पताल पहुंचते है लेकिन लैब टेक्नीशियन न होने की वजह से उन्हें वापस आना होता है। स्वास्थ्य विभाग का ढुलमुल रवैया देखकर इस बुजुर्ग दंपति ने स्वयं काे होम क्वारंटाइन कर लिया। वह मोहल्ला और बस्ती के लोगों से मिलना जुलना बंद कर चुके हैं। ऐसे ही जो लोग सक्षम है वे दतिया या ग्वालियर पहुंचकर इलाज करा रहे हैं। वहीं जो लोग सक्षम नहीं है। वे झोलाछाप डॉक्टर पर जाकर इलाज कराने पर विवश हैं।

आलमपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।

लैब टेक्नीशियन एक, सेवाएं तीन जगह

इस दौरान सबसे खास बात यह देखने को मिली है कि आलमपुर में पदस्थ लैब टेक्नीशिन करन सिंह से स्वास्थ्य विभाग तीन कस्बे में सेवाएं ले रहा है। करन सिंह पर आलमपुर के अलावा दबोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार है। इसके अलावा लहार सिविल हॉस्पिटल में भी सेवाएं देने के लिए बुलाया जाता है। ऐसे में सीधे तौर पर आलमपुर और दबोह कस्बे के लोग प्रभावित हो रहे हैं। इन दोनों कस्बे के लोग फीवर क्लीनिक पर पहुंचकर कोविड जांच समय रहते नहीं करा पा रहे हैं।

वैक्सीन भी नहीं लग रही नियमित

यहां कोविड जांच जहां नियमित नहीं हो रही है। फीवर क्लीनिक पर ताला रहता है। वहीं वैक्सीनेशन में भी लापरवाही बरती जा रही है। यहां पिछले दो दिन से कोरोना वैक्सीन का एक भी टीका किसी को नहीं लगा। ऐसे में सरकारें कोरोना वैक्सीन लगवाने पर जोर दे रही है। यहां पिछले दो दिन से वैक्सीन ही नहीं आई। वैक्सीनेशन के लिए आने वाले सरकारी स्कूल के शिक्षक देवेंद्र शर्मा का कहना है-

मैं एक माह बाद कोरोना का दूसरा डोज लगवाने आया था। पता चला कि अभी वैक्सीन है नहीं। अब वैक्सीन आने के बाद आना होगा।

वैक्सीन ही नहीं है, लैब टेक्नीशियन लहार गए

आलमपुर स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ चिकित्सक डॉ काशीनाथ शाक्य का कहना है –

अस्पताल की फीवर क्लीनिक पर किट के माध्यम से कोरोना जांच की जाती है। परंतु दो दिन से लैब टेक्नीशियन को लहार सिविल हॉस्पीटल में बुलाया जा रहा है, इसलिए यहां जांच नहीं हो पा रही है। वहीं, वैक्सीनेशन का कार्य वैक्सीन के अभाव में रूक जाता है। दो दिन से वैक्सीन नहीं आई। जैसे ही कोरोना वैक्सीन आएगी लगना शुरू हो जाएगा।

मैं पता करता हूं

कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस का कहना है कि आलमपुर में संसाधनों का अभाव नहीं है। जांच क्यों नहीं हो रही है। मैं पता करवाता हूं। वैक्सीन की भी अब कमीं नहीं है। स्वास्थ्य अफसरों से बात करता हूं।

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