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- If The Government Did Not Provide Water From The Tap, Then In Two Months Dug Wells, Irrigated 100 Plants, Now Getting Pure Air
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बीना3 घंटे पहलेलेखक: प्रमोद सैनी
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बीना| खुद के द्वारा खोदे गए कुएं से पेड़ों काे पानी देते हुए चैन सिंह।
आज जब विकास के नाम पर बेतहाशा हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं, हासुआ गांव के चैन सिंह लोधी की ये कहानी लोगों को पर्यावरण को सहेजने की सीख दे सकती है। पेड़-पौधों से जुनून की हद तक लगाव रखने वाले 36 वर्षीय चैन सिंह ने 6 साल पहले अपने बाड़े में करीब 100 पौधे लगाए थे। इनके लिए वह सरकारी नल से पानी भरते थे। चार साल पहले गर्मी के मौसम में पानी की कमी हुई तो गांव के लोगों ने उन्हें पौधों के लिए नल से पानी भरने से मना कर दिया। उनका कहना था कि हमें पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा और तुम पेड़ों में बर्बाद कर रहे हो।
इसके बाद चैन सिंह ने रात में घर के आंगन में ही कुआं खोदना शुरू कर दिया। वे दिन में रिफायनरी में नौकरी करते थे और रात में 4-6 घंटे तक कुएं की खुदाई। जुनून देख पत्नी ब्रह्मा, बेटी देवंती एवं किरण भी सहयोग करने लगीं। नतीजा यह कि बिना किसी सरकारी मदद के 2 माह के अंदर ही 27 फीट गहरा कुआं खोद लिया गया। चैन सिंह ने बताया कि चार साल तक भरपूर पानी मिलने से पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। इनसे फलों के साथ भरपूर ऑक्सीजन भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज भी गर्मी के दिनों में कुएं का पानी केवल पेड़ों के लिए ही उपयोग करते हैं, वही घर के लिए पानी सरकारी नल से लेकर आते हैं।
खुद करते हैं कुएं की सफाई।
इन पेड़ों से 24 घंटे में 200 लोगों को मिलेगी ऑक्सीजन
पीजी कॉलेज में पदस्थ सहायक प्राध्यापक (वनस्पति शास्त्र) डॉक्टर सतीश कुमार राय ने बताया कि इतने पौधों से 24 घंटे में 200 से अधिक लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सकती है।
चैन सिंह के बाड़े में इतने पेड़
50 यूकेलिप्टस,17 अमरूद, 12 आम इसके अलावा जामुन, नींबू, करौंदा, मुनगा, आंवला के 2-2 और केले के 3 पेड़ लगे हुए हैं।