जानिए कैसे मशीनों से तैयार होती हैं ऑक्सीजन: मरीज तक पहुंचने से पहले सात प्रक्रियाओं से गुजरती है हवा, तब बनती है ऑक्सीजन

जानिए कैसे मशीनों से तैयार होती हैं ऑक्सीजन: मरीज तक पहुंचने से पहले सात प्रक्रियाओं से गुजरती है हवा, तब बनती है ऑक्सीजन


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बड़वानी6 मिनट पहलेलेखक: राजाभाई कुर्मी 

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  • ऑक्सीजन संकट के इस दौर में जानिए कैसे मशीनों से तैयार होती हैं हमारी कृत्रिम सांसें

कोरोनाकाल में अभी ऑक्सीजन की कमी चल रह है। हम आपको बताते हैं कि लोगों को जिंदा रखने वाली ऑक्सीजन कैसे बनती है। वातावरण (वायुमंडल) से आने वाली हवा सात प्रक्रियाओं को गुजरने के बाद ऑक्सीजन बनती है। तब जाकर वायुमंडलीय हवा ऑक्सीजन के रुप में मरीज तक पहुंचती है और नया जीवनदान देती है।

भास्कर टीम ने राजघाट रोड स्थित मनोरमा अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट पर जाकर ऑक्सीजन कैसे बनती है, ये जाना। यहां पर मौजूद इंजीनियर अरनव आनंद पाठक ने बताया एयर कंप्रेशर की मदद से वायुमंडलीय हवा को खींचते हैं। ये अलग-अलग तरह के उपकरणों से गुजर कर ऑक्सीजन के रूप में टैंक में जमा होती है। यहां से मरीजों तक पहुंचाई जाती है। यहां पर लगे प्लांट से एक मिनट में 135 लीटर ऑक्सीजन बन रही है। वायुमंडलीय हवा में अलग-अलग गैस रहती है। बैक्टेरिया भी रहते हैं। इन्हें प्लांट के माध्यम से अलग-अलग कर शुद्ध ऑक्सीजन तैयार की जाती है। जो मरीजों को जीवन देने में कामगार है।

हर मिनट 50 लोगों के लिए मशीन तैयार कर देती है ऑक्सीजन

जानिए… किस उपकरण का क्या उपयोग होता है
एयर कंप्रेशर: सबसे पहले वायुमंडलीय हवा इसमें आती है।
एयर फिल्टर: ये हवा को साफ करता है।
एयर डायर: ये हवा में से डस्ट को अलग कर देता है।
एयर टैंक: हवा एयर टैंक में जमा होती है।
जीयो टावर: ये हवा में से अन्य गैसों को अलग कर देता है।
ऑक्सीजन टैंक: हवा ऑक्सीजन के रूप में टैंक में जमा हो जाती है।
बैक्टेरिया फिल्टर: ऑक्सीजन को फिल्टर से साफ कर मरीज को सप्लाय हो जाती है।

एक मिनट में 135 लीटर ऑक्सीजन बन रही
अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट से हर एक मिनट में 135 लीटर ऑक्सीजन बन रही है। इससे 50 से ज्यादा मरीजों की जान बचाई जा सकती है। अभी 24 घंटे ऑक्सीजन बनाई जा रही है।

ये भी जानिए… 20 से 40 लाख में लग जाता है प्लांट
कंपनी इंजीनियर ने बताया 20 से 40 लाख रुपए में छोटा प्लांट लग जाता है। यदि जिला अस्पताल सहित शहर के सभी अस्पतालों में ये प्लांट लगा होता तो ऑक्सीजन की कमी कुछ हद तक कम रहती।

इधर… जिला अस्पताल में रोजाना 130 जंबो सिलेंडर हो रहे खाली, फिर भी प्रयाप्त
बड़वानी | जिला अस्पताल में रोजाना ऑक्सीजन के 130 से ज्यादा जंबो सिलेंडर (एक में सात लीटर रहती है) खाली हो रहे हैं। यानि हर रोज 910 लीटर ऑक्सीजन की खपत हो रही है। हालांकि इतने ही रोजाना सप्लाय भी हो रहे हैं। ऑक्सीजन मेनेजमेंट प्रभारी अभयसिंह ओहरिया ने बताया जितनी जरूरत है। उतनी ऑक्सीजन मिलती जा रही है। अभी ज्यादा गंभीर स्थिति नहीं है। लेकिन कोविड वार्डों से कुछ मरीजों की शिकायतें आ रही है कि उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि सभी को ऑक्सीजन मिले।

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