कोरोना भगाने का दावा: ओझा बनकर गांव में करता था झाड़-फूंक, बेटे परदेश से आए तो हो गया संक्रमित, मौत के बाद कोई अंतिम संस्कार के​ लिए नहीं हुआ तैयार

कोरोना भगाने का दावा: ओझा बनकर गांव में करता था झाड़-फूंक, बेटे परदेश से आए तो हो गया संक्रमित, मौत के बाद कोई अंतिम संस्कार के​ लिए नहीं हुआ तैयार


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  • Ojha Used To Do Chanting In The Village, Son Was Infected When He Came From Pardesh, No One Was Ready For Funeral After Death.

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रीवा26 मिनट पहले

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  • कोरोना के डर से शव के नजदीक कोई जाने को तैयार नहीं, पूरे गांव में मचा हड़कंप
  • सोशल मीडिया में बचे बवाल के बाद एसडीएम ने नगर पंचातय के ट्रैक्टर में लदवाया शव
  • फिर परिसद के कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनकर किया अंतिम संस्कार

ओझा बनकर गांव में झाड़-फूंक करने वाले तांत्रिक की कोरोना से मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक कोरोना भगाने का दावा करना था। लेकिन जब खुद के बेटे परदेश से आए तो वह संक्रमित हो गया। बीते दिन गंभीर हालत में बुजूर्ग को आनन फानन में संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां कोरोना संदिग्ध म​रीज की मौत हो गई। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना सस्पेक्टेड मरीज मानते हुए बॉडी वापस लौटा दी। जिससे एंबुलेंस का चालक घर के सामने बॉडी छोड़कर वापस लौट गया।

शाम से रात हुई और दूसरे दिन सुबह हो गई। लेकिन कोरोना के डर से गांव और घर वालों ने बॉडी को नहीं छुआ। कोरोना संदिग्ध शव कई घंटों तक गांव में पड़े होने पर सोशल मीडिया में बवाल मचा। तब मनगवां एसडीएम केपी पाण्डेय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए नगर पंचायत मनगवां से तिवनी गांव एक टीम भेजी गई। जहां से कोरोना संदिग्ध मरीज की डेड बॉडी को ट्रैक्टर में लादकर श्मशान घाट पहुंचा गया। वहां पर कोरोना पोटोकाल के तहत परिसद कर्मचारियों ने मृतक का अं​तिम संस्कार कराया है।

कफन दफन के लिए कोई नहीं आया आगे
जन चर्चा है कि मृतक चंद्रशेखर तिवारी (परिवर्तित नाम) 60 वर्ष निवासी तिवनी वर्षों से झाड़-फूंक करता आ रहा है। लेकिन जब से कोरोना के केस बढ़े तो मानवता बस झाड़-फूंक कर लोगों की संकाये दूर कर देता था। लेकिन उसे क्या पता कि एक दिन झाड़-फूंक करना महंगा पड़ जाएगा। ग्रामीणों की मानें तो तीन-चार दिन पहले मृतक के दो लड़के बाहर से आए थे। जिनकी त​बियत काफी खराब थी। साथ ही दोनो बेटे कोरोना संक्रमित थे। ऐसे में पिता भी चपेट में आ गए और संजय गांधी अस्पताल में मौत हो गई। किसी तरह संदिग्ध शव गांव पहुंचा तो कोरोना के रूप में हड़कंप मच गया। गांव में तरह तरह की चर्चाए होने लगी। जब कफन दफन की बारी आई तो लोग हाथ खड़े कर दिए। न घर वाले आगे आए न परिवार वाले। उपर से गांव में कोई जागरूक आगे नहीं आया कि गर्मी के दिनों में ज्यादा समय तक बॉडी पड़े रहना संक्रमण का नया खतरा खड़ा कर सकती है। लेकिन जब गांव वाले आगे नहीं आए तो एसडीएम को पूरे मामले की जानकारी दी गई। जिन्होंने मनगवां नगर पंचातय के कर्मचारियों का सहयोग लेकर बुजूर्ग का अंतिम संस्कार कराया है।

बेटों को किया गया होम क्वारंटाइन
बताया गया कि मनगवां एसडीएम ने घर में कैद बाहर से आए दो युवकों को उपचार व्यवस्था के साथ गांव में ही क्वॉरेंटाइन करवाया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए है कि अगर इन युवाओं के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा तो संजय गांधी अस्पताल भेजा जाए। वहीं समय समय पर इनके स्वास्थ्य की पूरी मॉनिटरिंग की जाए। जबकि गांव वालों को नसीहत दी है कि अफवाहों से बचकर रहे। महामारी में एक दूसरे की मदद करें। न मदद करे तो स्थानीय प्रशासन को सूचना दे। लेकिन तहर तरह की भ्रातिंया गांव में न फैलाएं। जिसस आदमी हताश न हो।

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