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इंदौर6 घंटे पहलेलेखक: हेमंत नागले
अस्पताल के बाहर मरीज ने दम तोड़ दिया।
इंदौर में कोरोना संक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सभी अस्पतालों में बेड पूरी तरह से भर चुके हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर बेड और उपचार नहीं मिलने से उनकी मौतें हो रही हैं। ताजा मामला इंदौर के स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में सामने आया है, जहां बेड उपलब्ध नहीं होने के अभाव में अन्य हॉस्पिटल से लाए गए मरीज को गेट पर घंटों इंतजार करना पड़ा। भर्ती नहीं होने से आखिरकार उसने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया।
पहला मामला
सतना के रहने वाले अमित बघेल टाइफाइड के चलते 2 दिनों से इंदौर के पीसी मेमोरियल अस्पताल में इलाज करा रहे थे। परिजन के मुताबिक अस्पताल में आईसीयू वार्ड की व्यवस्था नहीं होने के कारण डॉक्टरों द्वारा उन्हें सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने को कहा गया। सुबह 11 बजे जब परिजन उन्हें लेकर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पहुंचे, तो घंटों इंतजार के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें भर्ती नहीं किया। इसके बाद उन्होंने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। इस दौरान डॉक्टर ने मरीज की जांच करने की जहमत भी नही उठाई। मरीज की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हुए। डॉक्टर्स के साथ ही अफसरों को कोसते नजर आए।
दूसरा मामला
मीडिया के कैमरे को देख बंटी मोरे नामक युवक ने बताया कि उनके पिता दशरथ मोरे 3 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। कोविड-19 रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई है, लेकिन डॉक्टर से पूछने पर वह जवाब नहीं देते। जब स्टाफ से पूछा गया कि क्या एक्स-रे व अन्य जांच हो चुकी है, लेकिन मरीज के परिजन को कुछ बताना उचित नहीं समझते। मशीनें खराब पड़ी हैं, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद भी अस्पताल में मरीज को भर्ती क्यों कर रखा है। इसका जवाब अस्पताल प्रबंधन के पास भी नहीं है।
ऑटो रिक्शा में मरीज को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाती रही लता साहू नामक महिला।
तीसरा मामला
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लता साहू ने बताया कि नेता केवल फोटो खिंचवाने के लिए अस्पतालों में आते हैं। कई बार विधायक संजय शुक्ला को फोन किया, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया। केवल मीडिया में खबरें दिखाने के लिए वह दौरे और अन्य कार्यक्रम करते हैं। वहीं, लता अपने परिजनों को सुबह से लेकर घूम रही है। हालत इतनी खराब थी कि लता साहू एमटीएस अस्पताल कभी एमवाय अस्पताल, कभी अरबिंदो अस्पताल सब जगह घूम के आ गई, लेकिन मरीज के लिए उसे बेड नहीं मिला।
इंदौर में बिगड़ती हुई स्वास्थ्य व्यवस्था किसी से छुपी नहीं है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और नेता मानने को तैयार नहीं हैं। इसका खामियाजा मरीजों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है।