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- Kotar Tehsil Area Will Be Gifted With A 50 bed Temporary Kovid Center, Corona Will Be Investigated For The First Time In An Area With A Population Of One And A Half Lakhs
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सतनाएक घंटा पहले
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कोटर में कोविड सेंटर खोलने की बात करते प्रभारी मंत्री
- कोविड प्रभारी मंत्री ने लिया स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा, क्योंकि अगर बेकाबू हुआ कोरोना तो कहा मिलेगा कोटर क्षेत्र के लोगों को उपचार
जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाओं को माप रहे कोविड प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल शुक्रवार की दोपहर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटर पहुंचे। जहां उन्होंने कोटर क्षेत्र में बढ़ रहे कोरोना के केसों को काबू करने के लिए 50 बेड के अस्थाई कोविड सेंटर बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पीएचसी के बगल में बने छात्रावास को में कोरोना की जांच होगी। साथ ही कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों को प्राथमिक उपचार कोटर में बनाए गए कोविड सेंटर पर दिया जाएगा। अगर केस सीरियस होगा तो उसको जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया जाएगा।
अगर कोटर क्षेत्र के इतिहास की बात करें तो डेढ़ लाख की आबादी वाले तहसील क्षेत्र में 84 गांव है। पर इलाज के नाम पर महज एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है। अभी तक न यहां पर कभी कोरोना की जांच हुई न फीवर क्लीनिक बनाया गया। साथ ही वैक्सीनेशन का स्थायी सेंटर तक नहीं है। न यहां कभी पोस्ट मार्टम हुआ। न कभी किसी मरीज को पूरा उपचार मिला है। पहली बार कोरोना के कहर से डरे जिम्मेदारों को आखिर आत्मा जागी और कोविड सेंटर बनाने की बात रखी है।
बता दें कि सतना जिले का कोटर तहसील क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। यहां औसतन डेढ़ लाख की आबादी में सिर्फ एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। ऐसे में क्षेत्र की मजबूर जनता जिला मुख्यालय में जाकर इलाज कराती है। जबकि जिले के लगभग सभी तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों में फीवर क्लीनिक सहित वैक्शीन सेंटर बनाए गए है। लेकिन कोटर क्षेत्र का फीवर क्लीनिक रामपुर बाघेलान रहता है। जो कि क्षेत्र से लगभग 60 से 70 किमीण् दूर बताया जाता है। ऐसे में कोटर क्षेत्र की जनता ब्लॉक मुख्यालय न जाकर जिला मुख्यालय से सीधे जुड़ी हुई है।
विकास में रोड़ा स्वयं स्थानीय लोग
गौरतलब है कि अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा कोटर नगर की जनता स्वयं विकास में रोड़ा बनी हुई है। क्योंकि सामूहिक कार्य में सबका सहयोग प्रशासन को मिलना चाहिए। लेकिन कोटर नगर के लोग नहीं करते है। जबकि इलाज के लिए लोग 20 से 30 किमी. की दूरी तय कर लेंगे। पर विकास की बात आएगी तो कोई न कोई रोड़ा जरूर बनेंगा।
मुख्य मार्ग को छोड़ अंदर है अस्पताल
आज के कल्चर में कोई भी कार्य अगर मुख्य मार्ग पर किया जाए तो दौड़ जाता है। फिर चाहे कोटर का थाना हो अथवा तहसील मुख्यालय लेकिन अस्पताल कोटर गांव के अंदर है। ऐसे में कुछ गांव के लोग स्वयं रोड़ा बने रहते है। जिससे जागरूक वर्ग उनसे दूर रहना चाहता है। साथ ही अाराजकत्तों से लोग दूरियां बना लेते है। उसी का नतीजा है कि आज कोटर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तो है लेकिन विकास से कोसों दूर है। यहां न मरीज इलाज कराना चाहते और न चिकित्सक उपचार करना चाहते है।
अधिकारियों के लिए काला पानी बना कोटर क्षेत्र
दावा किया जा रहा है कि कोटर क्षेत्र में हर वर्ग की सरकारी कार्यालयों में दखलंदाजी है। ऐसे में तहसील कार्यालय, ब्लॉक आफिस, ट्रेजरी कार्यालय, महिला बाल विकास और पुलिस थाने में अच्छे लोगों को कार्य नहीं किया जाता। वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक से लेकर स्टाप नर्स कोटर को कालापानी की सजा मानते है। हर दिन यहां लोगों को विरोध का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रसूखदार अधिकारी ही यहां टिक पाते है। बाकी ट्रॉसफर करा लेते है या नौकरी छोड़ देते है।