नई दिल्ली: सनराइजर्स हैदराबाद के खेमे से शनिवार को ऐसी खबर आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. दरअसल, सनराइजर्स हैदराबाद ने बीच आईपीएल टूर्नामेंट में ही डेविड वॉर्नर को कप्तानी से हटा दिया और न्यूजीलैंड के दिग्गज बल्लेबाज केन विलियमसन को कमान दे दी. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों डेविड वॉर्नर के साथ बीच आईपीएल टूर्नामेंट में ऐसा हुआ, जिनकी कप्तानी में सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने साल 2016 में आईपीएल का खिताब जीता था.
क्या थी कप्तानी से हटाने की वजह?
वॉर्नर को कप्तानी से हटाए जाने की वजह दिल्ली के खिलाफ मैच में गलत फैसले को माना जा रहा है. दरअसल, रविवार को सनराइजर्स हैदराबाद की टीम सुपर ओवर में दिल्ली से हार गई थी. हार के बाद डेविड वॉर्नर के फैसले पर तब सवाल खड़े हुए, जब उन्होंने सुपर ओवर में जॉनी बेयरस्टो को पारी शुरू करने नहीं भेजा. इस फैसले पर सहवाग सहित कई दिग्गजों ने सवाल उठाए थे.
मनीष पांडे को किया था बाहर
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मिली हार के बाद डेविड वॉर्नर ने कहा था कि मनीष पांड को ड्रॉप करना चयनकर्ताओं का एक कठोर फैसला था. वॉर्नर ने कहा कि आखिर में बात यह है कि यह एक निर्णय है जो उन्होंने लिया. विराट सिंह अच्छा खिलाड़ी है, लेकिन इस पिच पर रन बनाना मुश्किल था. बता दें कि मनीष पांडे को इसलिए प्लेइंग इलेवन से ड्रॉप कर दिया गया था, क्योंकि वह खराब फॉर्म में चल रहे थे. वॉर्नर ने विराट सिंह जैसे युवा भारतीय खिलाड़ियों को मौका देना जरूरी समझा था, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ विराट सिंह 14 गेंदों में 4 रन बना सके थे.
वॉर्नर और मूडी के बीच तकरार
सूत्र ने कहा, ‘टीम प्रबंधन को उनका यह बयान रास नहीं आया. वैसे भी वॉर्नर और मूडी अंतिम एकादश के चयन को लेकर एकमत नहीं होते हैं.’ पीटीआई ने सूत्रों के हवालों से लिखा कि टॉम मूडी (Director of cricket) और डेविड वॉर्नर की बिल्कुल नहीं पटती है और दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मनीष पांडे को हटाकर विराट सिंह को शामिल करने से मतभेद और बढ़ गए. वॉर्नर ने हार के बाद कहा भी कि पांडे को हटाने का फैसला कड़ा था.