संक्रमण में खरीदी का खेल: उपार्जन से कोरोना ना फैले इसलिए घटाए किसान और बढ़ाए संसाधन; हकीकत – खरीदी केंद्र पर 4 की जगह 2 तौल कांटे, चौथे दिन आ रही किसान की बारी

संक्रमण में खरीदी का खेल: उपार्जन से कोरोना ना फैले इसलिए घटाए किसान और बढ़ाए संसाधन; हकीकत – खरीदी केंद्र पर 4 की जगह 2 तौल कांटे, चौथे दिन आ रही किसान की बारी


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खंडवा9 मिनट पहले

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जावर सोसायटी के खरीदी केंद्र पर सिर्फ दो तौलकांटे से तौल

कोरोना संक्रमण काल में गेहूं और चना खरीदी जारी है। उपार्जन से कोरोना ना फैले इसलिए सरकार ने खरीदी केंद्र पर किसानों की संख्या घटा दी तो वहीं संसाधन बढ़ाए है। बावजूद संक्रमण का खतरा कायम है। जिम्मेदार तकनीकी खामियां होने की वजह बता रहे हैं।

हकीकत, यह है कि खरीदी केंद्र पर 4 की जगह 2 तौल कांटों से तौल हो रहा है। रोजाना निर्धारित 10 किसान में भी किसान की बारी चौथे दिन आ रही है। किसानों की संख्या बढ़ने से कहीं ना कहीं वह संक्रमित हो रहे है। यहीं संक्रमण वह गांवों में ले जा रहे है।

चार-पांच दिन से खड़े ट्रैक्टर-ट्राली

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– जावर सोसायटी के गेहूं खरीदी केंद्र का मामला

भास्कर ने बुधवार को सहकारी समिति जावर के गेहूं खरीदी केंद्र तलवडिया जाकर रियलिटी चेक किया। इस खरीदी केंद्र से आसपास के गांव रोहिणी, जावर, धनगांव, गोहलारी लगे हुए है।

रोहिणी से आए किसान संजय बसालिया, नंदराम सिंह का कहना है कि वह बीते चार दिन से खरीदी केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे है। समय पर किसानों का गेहूं नहीं तौला जा रहा है। सोसायटी में 4 तौल कांटे है लेकिन सिर्फ 2 को ही उपयोग में लिया जा रहा है। इस बीच ट्रैक्टर-ट्राली का भाड़ा जारी रहता है।

तौलकांटों में भी तकनीकी खामियां

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– प्रति बोरी 200 ग्राम गेहूं ज्यादा तौल रहे है

खरीदी केंद्र पर लगे तौल कांटे पर प्रति बोरी कुल वजन 50 किलो 300 ग्राम लिया जा रहा है। जबकि निर्धारित मापदंड अनुसार 50 किलो 135 ग्राम लिया जाना चाहिए। इस पर खरीदी केंद्र प्रभारी कैलाश झाला का तर्क था कि धूप के कारण गेहूं सूखने से शाम तक बोरी में वजन कम हो जाता है। जबकि किसान कल्याण पटेल ने बताया यह गेहूं मार्च में थ्रेसिंग हुआ था। बिल्कुल भी नमी नही है।

– तकनीकी खामियां बन रही वजह

उपार्जन कार्य में तकनीकी खामियां वजह बन रही है। सर्वर डाउन होने से बिल नहीं बन पा रहे है। वहीं तौल कांटे पर हम्माल नहीं मिलने से देरी हो रही है। जिले में बारदान की कमी भी थी।

– रोहित श्रीवास्तव, डीएमओ, खंडवा

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