कोरोना में अनदेखी: जिले में हर दूसरे व्यक्ति के पास आयुष्मान कार्ड, 5 माह पहले एक तिहाई के ही बने थे, 8.14 लाख अब भी वंचित

कोरोना में अनदेखी: जिले में हर दूसरे व्यक्ति के पास आयुष्मान कार्ड, 5 माह पहले एक तिहाई के ही बने थे, 8.14 लाख अब भी वंचित


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सागर23 मिनट पहलेलेखक: संदीप तिवारी

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  • 15.82 लाख लोग आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र, इनमें से 7.68 लाख के कार्ड बने

आयुष्मान कार्ड धारकों का कोरोना का इलाज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी अस्पतालों में निशुल्क करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में जिले की जो स्थिति है, उसके अनुसार जिले में करीब 7 लाख 68 हजार लोग ऐसे हैं, जिनके पास आसमान कार्ड हैं। जबकि 8 लाख 14 हजार लोग ऐसे भी हैं जिनके आयुष्मान कार्ड अभी बनना है। इस हिसाब से देखा जाए तो जिले में हर दूसरे व्यक्ति के पास कार्ड है तो हर दूसरा व्यक्ति ही इस कार्ड से वंचित है। दरअसल 14 दिसंबर 2020 के पहले तक यानी योजना शुरू होने के शुरुआती सवा दो साल में जिले में सिर्फ 4 लाख 80 हजार लोगों के ही आयुष्मान कार्ड बने थे।

इसके बाद आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए अभियान चलाया गया और उसकी जिम्मेदारी महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र के वीएलई को दी गई। जिसके बाद काम में तेजी आई और करीब 2 लाख 68 हजार नए कार्ड बने। यानी योजना की शुरुआत के सवा दो साल में जितने कार्ड बने उसके 70% कार्ड इन 5 माह में ही बन गए। यह कार्ड और भी ज्यादा बन गए होते, परंतु महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र द्वारा वीएलई का मानदेय रोक दिया गया। साथ ही जो 14 रुपए प्रति कार्ड का भुगतान वीएलई और सीएससी संचालकों को सीएससी ने देने की बात कही थी, वह भी नहीं दिया गया।

जिले में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक बार फिर से आयुष्मान कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही यह व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है कि अस्पताल में ही संबंधित मरीजों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाएं। परंतु जिला प्रशासन और सरकार ने समय रहते ही ध्यान दिया होता और संबंधित वीएलई को मानदेय मिलता रहता तो अभी इससे भी ज्यादा कार्ड बनकर तैयार हो गए होते।

फैक्ट फाइल
4.80 लाख कार्ड : 23 सितंबर 2018 से 14 दिसंबर 2020 के बीच बने जिले में।
2.90 लाख कार्ड : 14 दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 तक कार्ड जिले में बनाए गए।
7.68 लाख कार्ड : जिले में योजना शुरू होने से लेकर अब तक बनाए जा चुके हैं।
15. 82 लाख कार्ड : कुल बनाए जाने का लक्ष्य जिले में प्रस्तावित है।
750 : सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) हैं, जिले में जहां से कार्ड बनवाए जा सकते हैं।
139 : कुल वीएलई हैं, जिले में जो मानदेय पर हैं, जिन्हें कार्ड बनाने की भी जिम्मेदारी दी गई है।

वीएलई से 2.88 लाख कार्ड बनवाए फिर भी 9 माह से नहीं दिया मानदेय, कमीशन के 40 लाख भी रोके

जिले में महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र के तहत 139 वीएलई यानी विलेज लेवल उद्यमी की नियुक्ति की गई थी। इन सभी से अगस्त 2020 से लगातार काम कराया जा रहा है। इन्होंने ही तेज गति से आयुष्मान कार्ड बनवाकर ऐसी स्थिति बना दी है कि जिले में अब हर दूसरे व्यक्ति के पास आयुष्मान कार्ड है। बावजूद इसके इन्हीं का 9 माह का वेतन महात्मा गांधी ग्राम सेवा केंद्र द्वारा रोक कर रखा गया है।

जिला पंचायत द्वारा भी इस संबंध में कई बार भोपाल चर्चा की गई है, बावजूद इसके संबंधितों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है। हर बार बिल पेंडिंग होने का आश्वासन दे दिया जाता है। प्रत्येक को 6000 रुपए का मासिक मानदेय मिलना है। इस हिसाब से करीब 75 लाख रुपए सभी का बकाया है। शासन की इसी उदासीनता से वीएलई अब काम करने से इंकार कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में सागर नंबर-2 पर, अब मौके पर बन रहे कार्ड
अभियान के दौरान जिले में सबसे अधिक कार्ड बनवाने के मामले में हम प्रदेश में नंबर 2 पर रहे। 680 रोजगार सहायकों की आईडी बना दी गई हैं। वे सब कार्ड बना रहे हैं। इसके साथ ही मौके पर ही लोगों के कार्ड बनाए जा रहे हैं। वीएलई के रुके हुए मानदेय और कमीशन के लिए लगातार संवाद चल रहा है। जल्दी ही भुगतान की उम्मीद है। डॉ. इच्छित गढ़पाले, सीईओ जिला पंचायत

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