महामारी के दौर में माँ के जज्बे को सलाम: बेरोजगार हो गए बच्चे बुजुर्ग माँ ने फिर सँभाली परिवार की जिम्मेदारी

महामारी के दौर में माँ के जज्बे को सलाम: बेरोजगार हो गए बच्चे बुजुर्ग माँ ने फिर सँभाली परिवार की जिम्मेदारी


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जबलपुर3 घंटे पहले

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वर्षा का कहना है कि वे परेशान थीं, लेकिन किसी के सामने मदद के लिए हाथ फैलाना उन्हें मंजूर नहीं था, इसलिए उन्होंने दोबारा काम करना शुरू किया है।

दुनिया के हर धर्म और शास्त्र में माँ का दर्जा भगवान से ऊपर माना जाता है। माँ जीवनदायिनी होने के साथ संकट की किसी भी घड़ी में अपने बच्चों की रक्षा के लिए सब कुछ त्याग करने की क्षमता रखती है। ऐसी ही कहानी है पानदरीबा में रहने वाली 60 वर्षीय वर्षा जैन की, जिनके पति कमलेश जैन कई साल से बीमारी के कारण बिस्तर पर ही रहते हैं।

उनकी दो बेटियाँ और एक बेटा है, बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, घर पर छोटी बेटी रुचि 23 और बेटा ऋषभ 20 हैं। वर्षा के पति प्राइवेट नौकरी करते थे, लेकिन करीब 15 साल पहले पति के बीमार होने पर वर्षा ने जैसे-तैसे मेहनत मजदूरी करके पति की देखरेख के साथ तीनों बच्चों का पालन-पोषण किया।

समय बदला बच्चे बड़े हुए और बच्चों ने प्राइवेट नौकरी करके परिवार की जिम्मेदारी सँभाल ली। जिसके बाद वर्षा घर पर रहकर सिर्फ पति की सेवा करने लगीं। सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन कोरोना त्रासदी ने एक बार िफर वर्षा के परिवार की परेशानियाँ बढ़ा दीं।

लॉकडाउन के कारण रुचि और ऋषभ की नौकरी और काम सब कुछ बंद हो गया। बीमार पति के इलाज की जिम्मेदारी और बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रखना वर्षा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, इसलिए उन्होंने बुढ़ापे में एक बार फिर परिवार की जिम्मेदारी लेते हुए घरों में खाना बनाने का काम शुरू कर िदया।

काम के दौरान हर तरह की ऐहतियात बरतती हैं – वर्षा ने बताया कि वे जिन घरों में काम करने जाती हैं, वहाँ हर तरह की ऐहतियात बरतती हैं। मास्क, सेनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ साफ-सफाई को लेकर वे हर समय सजग रहती हैं।

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