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- Gwalior Crime Branch Police Did 5 Life saving Dodges Spoiled, Collector Wrote To SP, Said Get The Whole Case Investigated
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ग्वालियर19 मिनट पहले
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प्रतीकात्मक फोटाे।
- बीते दिनों पुलिस ने पांच इजेक्शनों को किए थे जब्त।
बीते दिनों रेमडेसिविर इंजेक्शन की काला बाजारी की शिकायत पर ग्वालियर क्राइम ब्रांच पुलिस द्वारा पांच इंजेक्शन जब्त किए थे। इन इंजेक्शनों की जांच की जानी थी कि असली है या नकली। कोविड महामारी के मरीजों के उपचार में सहायक इन इंजेक्शनों को सामान्य तापमान में रखा गया। जिससे मरीज के लिए उपयोगी सिद्ध होने वाले पांच जीवन रक्षक डोज खराब हो गए। यह शिकायत ग्वालियर कलेक्टर के पास बीते रोज आई। इस शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने एसपी को जांच किए जाने के लिए पत्र लिखा है।
बीते रोज कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को नाका चंद्रवदनी निवासी आशीष चतुर्वेदी द्वारा शिकायत की गई थी कि कोविड महामारी के दौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की रोकथाम को लेकर पुलिस द्वारा 8 मई को पांच रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त किए थे। यह इंजेक्शन जब्त होने के बाद पुलिस ने मीडिया के सामने पेश किए थे। यह इंजेक्शनों की तत्काल जांच कराई जा सकती थी।
यह जांच DRDO या फिर निर्माता कंपनी के माध्यम से अथवा मालनपुर में स्थित ड्रग्स कंपनी के माध्यम से कराई जा सकती थी। यह इंजेक्शनों को सामान्य तापमान पर नहीं रखना था। इन जीवन रक्षक इंजेक्शनों को 2 से 5 डिग्री तापमान पर सुरक्षित तरीके से रखा जा सकते थे। परंतु पुलिस द्वारा इन जीवन रक्षक डोज को पुलिस मालखाने में जब्त कराए। ऐसा कराए जाने से यह इंजेक्शन की उपयोगिता बेकार हो गई है।
ऐसे भी इंजेक्शन की हो सकती थी जांच
शिकायतकर्ता चतुर्वेदी ने यह भी कहा है कि मेरे विचार से इन जीवन रक्षक इंजेक्शनों को उपयाेग में लाकर इन इंजेक्शनों का बैच नंबर व अन्य विवरण को मरीज की फाइल में दर्ज कर सकते थे। ऐसा किए जाने से जरूरत के हिसाब से इंजेक्शन की असली या नकली की जांच निर्माता कंपनी को डिटेल भेजकर कराई जा सकती थी। फिलहाल शिकायत कर्ता के आवदेन पर कलेक्टर द्वारा पूरे मामले की पड़ताल किए जाने को लेकर एसपी को पत्र लिखा जा चुका है।