How much water was filled with sewage treatment plant installed in Phulbagh, Lokayukta was unable to inform the police | फूलबाग में लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से कितना पानी भरा, लोकायुक्त पुलिस को जानकारी नहीं दे पा रहे जिम्मेदार

How much water was filled with sewage treatment plant installed in Phulbagh, Lokayukta was unable to inform the police | फूलबाग में लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से कितना पानी भरा, लोकायुक्त पुलिस को जानकारी नहीं दे पा रहे जिम्मेदार


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ग्वालियर21 मिनट पहले

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  • 1.96 करोड़ रुपए खर्च कर लगाए गए प्लांट से डेढ़ साल में नहीं भर पाया बोट क्लब

फूलबाग को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का सपना दिखाकर यहां बोट क्लब, बैजाताल और जलबिहार में पानी भरने के लिए 1.96 करोड़ की लागत से लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पिछले दो माह में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी लोकायुक्त पुलिस को ये हिसाब नहीं दे पा रहे हैं कि डेढ़ साल में इस प्लांट से सीवर का कितना पानी फिल्टर कर, कहां भरा गया। प्लांट लगाते समय निगम अधिकारियों का दावा था कि प्लांट से रोजाना दस लाख लीटर पानी की फिल्टर किया जा सकेगा। लोकायुक्त पुलिस ने 26 जून को इस मामले में अधीक्षण यंत्री श्री मौर्य को सात दिन में विस्तृत जानकारी देने के लिए पत्र भेजा था। जानकारी न मिलने पर 30 जून को निगमायुक्त संदीप माकिन को पत्र भेजकर प्लांट के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी दिलवाने के लिए पत्र भेजा गया। लेकिन जिम्मेदार अब तक प्लांट के संबंध में मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए हैं। लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने जिम्मेदारों से पूछा है कि सबसे पहले प्लांट की लागत किस आधार पर तय की गई है। प्रारंभिक जांच के दौरान प्लांट की कीमत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रारंभित पड़ताल में लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने पाया है कि उक्त प्लांट की लागत एक करोड़ रुपए के आस-पास होना चाहिए थी। 

कितना पानी फिल्टर हुआ और कहां भरा गया
लोकायुक्त पुलिस ने निगम से यह भी जानकारी मांगी है कि एक एमएलडी यानि दस लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले प्लांट से पिछले डेढ़ साल में सीवर का कितना पानी फिल्टर किया गया और इस पानी को कहां भरा गया? याद रहे, जिम्मेदार अधिकारियों ने पिछले साल दिसंबर तक बोट क्लब में पानी भरकर शुरू करने का दावा किया था। लेकिन पानी फिल्टर न हो पाने के कारण बोट क्लब को नहीं भरा जा सका। वहीं, दूसरी ओर जलविहार के कुंड का पानी न बदल पाने के कारण सर्दियों में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई थी। 

पानी की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट मांगी 
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से फिल्टर किए गए पानी की गुणवत्ता की जांच किस लैब में कराई गई और उसके परिणाम क्या आए? इसकी जानकारी भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा मांगी गई है। निगम का जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय ग्वालियर में है। यहां से यदि फिल्टर किए गए पानी की कोई रिपोर्ट कराई गई तो उसकी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

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