रतलाम15 मिनट पहले
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- जिला प्रशिक्षण केंद्र में सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण दिया
विरियाखेड़ी स्थित जिला प्रशिक्षण केंद्र में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया से बचाव के लिए सेवा प्रदाताओं का प्रशिक्षण हुआ। सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ननावरे ने बताया सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता क्षेत्र में भ्रमण के दौरान बुखार के मरीजों पर निगरानी रखे। उनके लक्षण देख उनकी जांच करवाएं। मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ध्रुवेंद्र पांडे ने कहा कि मलेरिया मुख्य रूप से वायवेक्स और फेल्सीपेरम दो प्रकार का पाया जाता है। यह मादा एनाफिलिस नामक मच्छर के काटने से होता है। इसके सामान्य लक्षण ठंड लगकर तेज बुखार आना, सिरदर्द, हाथ-पैर और मांसपेशियों में दर्द, बुखार उतरने के बाद थकावट व कमजोरी होना है। इसके लिए रक्त की जांच की जाती है। मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए ताकि संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके।
पानी को जमा ना होने दें
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. प्रमोद प्रजापति ने कहा कि मच्छर ठहरे हुए पानी में पैदा होते हैं इसलिए, लार्वा की ब्रीडिंग के सभी स्रोतों को समाप्त करना चाहिए। घरों के आसपास गड्ढों को भरवा दें, या मिट्टी का तेल डालें। सप्ताह में एक बार कूलर का पानी खाली करें।
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