इंदौर15 मिनट पहले
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लाड़ कुंवर पति तेजसिंह के साथ।
- अस्पताल चेयरमैन डॉ. राजेश भार्गव ने बताया कि 16 जुलाई को सर्जरी की गई
प्रदेश का पहला लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सीएचएल हाॅस्पिटल इंदौर में हुआ। पीड़ित व्यक्ति पेट में बार-बार पानी भरने की समस्या से परेशान था। दवा से इलाज संभव नहीं था। लिहाजा पत्नी ने लिवर का एक हिस्सा दिया। तेजसिंह मेवाड़ा के पेट का इलाज डाॅ. अमोल पाटिल से चल रहा था। दवाओं से असर न होने पर उसकी पत्नी लाड़ कुंवर को सलाह दी गई कि लिवर ट्रांसप्लांट कराया जाए। वह अपने लिवर का हिस्सा देने को राजी हो गई। अस्पताल चेयरमैन डॉ. राजेश भार्गव ने बताया कि 16 जुलाई को सर्जरी की गई।
डॉ. भार्गव के मुताबिक ऑपरेश के एक सप्ताह बाद लाड कंुवर को डिस्चार्ज कर दिया गया। अब तेज सिंह भी पूरी तरह स्वस्थ हैंै। कैडेबर ऑर्गन डोनेशन में मृत व्यक्ति का ऑर्गन लेकर मरीज को लगाया जाता है। लाइव डोनेशन में किसी रिश्तेदार मरीज को अंग देता है। डोनर को कुछ समय पहले ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। डॉ. गौतम ने बताया कि कई राज्यों में अभी तक शुरू नहीं हुआ। मप्र के मरीजों को ट्रांसप्लांट के लिए अब दूसरे शहर का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके पूर्व सीएचएल में 4 कैडेबर लिवर ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। टीम ने डाॅ. ज्योति बिंदल, डीन (एमजीएम मेडिकल काॅलेज, इन्दौर) एवं अंग प्रत्यारोपण प्राधिकार समिति व गांधी मेडिकल काॅलेज भोपाल के सहयोग के लिए आभार माना।
लिवर का 575 ग्राम हिस्सा निकाला, छह हफ्ते में स्वत: आ जाएगा उसी आकार में
डाॅ. विनीत गौतम, डाॅ. अमित गांगुली, डॉ. वासुदेवन ने यह ऑपरेशन किया। डॉ. गांगुली ने बताया कि डोनर के लिवर से 575 ग्राम हिस्सा निकाला गया, जो 6 हफ्ते में रीजनरेट हो जाएगा। तेज सिंह के ऑपरेशन में पेट से 10 लीटर पानी निकला।
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