I was 34 when I got divorced, am 44 years old now, age is coming out, at least allow second marriage | तलाक हुआ तब 34 का था, अब 44 साल का हाे गया हूं, उम्र निकली जा रही है, कम से कम दूसरी शादी की ही अनुमति दे दाे

I was 34 when I got divorced, am 44 years old now, age is coming out, at least allow second marriage | तलाक हुआ तब 34 का था, अब 44 साल का हाे गया हूं, उम्र निकली जा रही है, कम से कम दूसरी शादी की ही अनुमति दे दाे


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भोपाल3 घंटे पहले

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हाईकोर्ट।

  • भाेपाल के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ऑनलाइन पत्र लिख लगाई गुहार

जिला अदालत से 10 साल पहले तलाक हो गया था। इस पर महिला ने हाई कोर्ट में अपील कर दी। कई बार पुरुष ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर मामले की सुनवाई जल्दी करने की गुहार लगाई। इसके बावजूद कभी तारीख बढ़ जाती तो कभी जज बदल जाते।

अपील की वजह से दूसरी शादी न कर पाने के कारण एक याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ऑनलाइन पत्र लिखकर आवेदन किया है कि तलाक लिए दस साल हो गए हैं। 10 बार शीघ्र सुनवाई के लिए इंटर्न आवेदन भी प्रस्तुत कर चुका हूं। अपील की सुनवाई नहीं हाे रही है, तो कम से कम दूसरी शादी की अनुमति ही दे दाे। यह पत्र लिखा है भोपाल निवासी योगश तिवारी ने। उनका कहना है कि जिला अदालत में क्रूरता काे आधार को मानते हुए 16 नंबवर 2010 को तलाक हाे गया था। इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। मामले में हर दो माह में नई तारीख दे दी जाती है, लेकिन अपील पर सुनवाई नहीं हो रही है। तलाक हुआ था उस समय उम्र 34 साल थी। अब 44 साल हो गई है। सुनवाई नहीं होने से शादी की उम्र भी निकलती जा रही है। पत्नी कहती हैं भले ही जिला अदालत ने तलाक दे दिया हाे, लेकिन वे उन्हें न जीने देगी न मरने। जिस समय सुनवाई की तारीख आती है वाे कोई न कोई कारण बताकर अगली तारीख ले लेती हैं।

बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी है…इसलिए जल्द दें अनुमति

योगेश ने पत्र में बताया है कि उनके पिता 86 साल के हैं। उन्हें कैंसर, शुगर और हार्ट की बीमारी है। वहीं मां 76 वर्ष की है और अस्थमा की पेशेंट है। दोनों की सेवा की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। चूंकि पूर्व में मेरा एक्सीडेंट हो गया था इसलिए मुझे ही उनकी सेवा के लिए एक पार्टनर की जरूरत है। भले ही अपील की सुनवाई न हो, लेकिन मानवीयता के आधार पर दूसरी शादी करने की अनुमति दी जाए।

चार साल चली शादी
योगेश ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को लिखे पत्र में बताया है कि उनकी शादी 13 जून 2006 को हुई थी। चार साल चली शादी में उनके बच्चे नहीं हुए थे। आपसी मतभेद इतने बढ़ गए थे कि नौबत तलाक तक आ गई थी। जिला कोर्ट ने भी दोनों पक्षों को सुनने के बाद क्रूरता को आधार मानकर उनके पक्ष में तलाक दे दिया था।

याचिका खारिज हुई थी
भाई संस्था के फाउंडर मेंबर जकी अहमद ने बताया कि ऐसे ही तलाक के 10 साल से अधिक लंबित मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपीलार्थी महिला की याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि जब तलाक की डिक्री परित हुए लंबा समय गुजर गया है तो याचिका का अब औचित्य नहीं रह गया।

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