Bhopal Coronavirus Updaets, COVID Warriors News: Meet Madhya Pradesh 50-Old-Year Woman Who Donates Plasma To Patients | 50 की उम्र में महिला ने कोरोना की जंग जीती, अब जान बचाने प्लाजमा डोनेट किया, ट्रांसपोर्टर पति ने वाट्सएप पर कोविड ग्रुप में 18 लोगों को जोड़ा, 2 डोनर भी तैयार

Bhopal Coronavirus Updaets, COVID Warriors News: Meet Madhya Pradesh 50-Old-Year Woman Who Donates Plasma To Patients | 50 की उम्र में महिला ने कोरोना की जंग जीती, अब जान बचाने प्लाजमा डोनेट किया, ट्रांसपोर्टर पति ने वाट्सएप पर कोविड ग्रुप में 18 लोगों को जोड़ा, 2 डोनर भी तैयार


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अनूप दुबे, भोपाल8 मिनट पहले

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अस्पताल से फोन आने के बाद बबीता ने मरीज को अपना प्लाजमा डोनेट किया। अब लोगों को जागरुक कर रही हैं। यह फोटो 2 अगस्त का है। वे अस्पताल की पहली प्लाजमा डोनर बनी।

  • ईद के दिन महिला ने प्लाजमा मरीज को दिया था, इसी के बाद ट्रांसपोर्टर पति ने पत्नी के साथ मुहिम शुरू की
  • कोविड को मात दे चुके लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें प्लाजमा का महत्व बताकर जागरुक भी कर रहे हैं

राजधानी भोपाल में 50 साल की उम्र पर कर चुके दंपत्ति ने न केवल कोरोना को मात दी, बल्कि अब उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने की मुहिम भी शुरू कर दी हैं। महिला ने एक गंभीर मरीज को अपना प्लाजमा डोनेट किया, तो ट्रांसपोर्टर पति ने इसके लिए कोविड-19 को हराने वाले परिचितों का कोविड वारियर्स नाम से ग्रुप बनाया है। छह दिन पहले शुरू किए गए इस ग्रुप में अब तक 18 लोग जोड़े जा चुके हैं। इनमें से ट्रांसपोर्टर की पत्नी और उनके दोस्त विकास प्लाजमा डोनेट भी कर चुके हैं, जबकि पत्नी की सहेली संध्या और वे खुद इसके लिए तैयार हैं।

उनकी जिंदगी भी अहम है
इतवारा में रहने वाले 55 साल के विनोद जैन ट्रांसपोर्टर हैं। उनके अनुसार- तबीयत खराब होने पर तीन जून को कोविड़-19 टेस्ट कराया। 4 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 5 को अस्पताल में भर्ती हो गया। दो दिन बाद पत्नी बबीता भी कोरोना पॉजिटिव होने के कारण अस्पताल में आ गई। वह बेहद ही मुश्किल भरा समय था। मानसिक तनाव उससे भी कहीं ज्यादा था। फिलहाल ठीक होकर हम घर आ गए और पहले की तरह जीवन जीने लगे। 1 जुलाई को अस्पताल से फोन आता है कि एक मरीज की हालत खराब है और उनका प्लाजमा उसकी मदद कर सकता है। मैं अपनी पत्नी को लेकर बंसल अस्पताल पहुंचा। मरीज के परिजनों से बात की। बबीता ने पहले प्लाजमा डोनेट किया। मरीज के परिजनों को देखते ही सुकून मिला। उसके बाद हमने कोविड वारि‍यर्स का ग्रुप बनाकर लोगों की मदद करने का निर्णय लिया।

लोगों की काउंसिलिंग कर रहे
विनोद ने बताया कि अब तक उनकी जानकारी में कोविड से ठीक होने वाले परिचितों का ग्रुप बनाया है। इसमें हम चार लोग तैयार हो गए हैं। अन्य लोगों को इसके बारे में बता रहे हैं, ताकि वे प्लाजमा को लेकर भ्रांतियां न पालें और लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

इस तरह किया जाता है प्लाजमा डोनेट
हमीदिया अस्पताल के स्वास्थ्य रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ.लोकेंद्र दवे के अनुसार- 2 यूनिट (300 एमएल) प्लाजमा एक व्यक्ति से निकाला जाता है। इसके लिए कंप्यूटरीकृत एक मशीन होती है। इसे डोनर के हाथ में लगाया जाता है। मशीन ब्लड निकालकर उसमें से प्लाजमा अलग कर देती है और खून वापस शरीर में चला जाता है। इस प्रक्रिया में करीब एक घंटा लग जाता है। 2 यूनिट प्लाजमा निकलने के बाद यह प्रक्रिया बंद हो जाती है। इस दौरान डॉक्टर की एक टीम वहां मौजूद रहती है। इससे डोनर को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। यह प्लाजमा बीमारी की शुरुआत में देना ज्यादा मददगार होता है। डोनर का पहले एंटीबॉडी टेस्ट होता है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही प्लाजमा दिए जाने की अनुमति मिलती है।

प्लाजमा के बारे में
प्लाजमा में फैट, प्रोटीन और प्रतिरोधक (एंटीबॉडी) तत्व होते हैं। ठीक हो चुके कोविड पॉजिटिव में कोरोना के लिए एंटीबॉडी बन जाती है। इसलिए यह प्लाजमा कोविड मरीजों को दिया जाता है। डॉक्टरों की माने तो प्लाजमा शरीर में 2 घंटे बाद दोबारा बन जाता है। यह दूसरी बीमारियों में भी इसी तरह प्रयोग के तौर पर उपयोग किया जाता है। 60 साल से अधिक उम्र और 18 साल से कम उम्र के लोगों का प्लाजमा नहीं लिया जाता है।

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