भोपालएक घंटा पहले
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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ जो कथित फतवा वायरल हुआ है उसमें एक तरफ फतवा लिखा है और दूसरी तरफ उन्हें पूजा करते दिखाया गया है।
- फतवा सही है या गलत, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है
- फतवे का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का स्वागत और कांग्रेस कार्यालय में धार्मिक आयोजन करना हैदराबाद की इस्लामिक संस्था तंजीम जामिया निजामिया को पसंद नहीं आया है। संस्था ने कमलनाथ के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। हालांकि, फतवा सही है या गलत- इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन, फतवे का पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
क्या लिखा है फतवे में
- फतवे में कहा गया कि पिछले कुछ अरसे से कमलनाथ और कांग्रेस ने जिस तरह से मुसलमानों से मुंह मोड़ा है उससे साफ है कि अब हमारा साथ देना उनकी सियासत के हक में नहीं है।
- कौम को कभी भी कमलनाथ पर पुरसुकून यकीन नहीं था फिर भी जिस तरह से उन्होंने कौम के नुमाइंदों के आगे हिंदुओं से निपट लेने के दलीलें दी थी, उस पर हमने भी खुलकर उनका हाथ थामा था।
- पिछले एक हफ्ते से उनकी बेखौफ हिंदूपरस्ती के नमूने मीडिया में देख रहे हैं। कभी हनुमान की पूजा, कभी शहीद बाबरी मस्जिद पर बन रहे राम मंदिर का इस्तकबाल, उनके बयानों में कौम की दिली तकलीफ के लिए जरा भी हमदर्दी नहीं थी।
- उनकी हरकतों ने शक की हर बुनियाद को साफ कर दिया है कि मुसलमान सिर्फ उनके लिए सियासती प्यादे हैं जिन्हें वे अपनी हुक्मरानी में कुर्बान कर सकते हैं। आने वाले समय में कौम का रुख साफ है।
- सियासतदां जिस तिजारतीतौर पर कौम को तौलते हैं, अब मुसलमानों को भी सियासी पार्टियों को फायदे के तराजू पर तोलना होगा, कमलनाथ की शतरंज में कुर्बान होना हमें कुबूल नहीं है।
- इस वाकये के बाद से कौम के सभी ख्वातीनों हजरात् को हमारा मशविरा है कि आने वाले इंतिखाबात में कमलनाथ और कांग्रेस के भरोसे ना रहे। अपने इलाके में आपका साथ देने वाले नुमाइंदे को तौल कर अपना वोट दें।
- फतवे के आखिर में लिखा गया है कि इस मुल्क में अब मुसलमान अकेला है। हमें कांग्रेस और कमलनाथ के भरोसे नहीं रहना। बहुत सोच समझ कर अपना रहनुमा चुनना है और हमें अपने दीन पर भरोसा करना है।

कथित फतवे में किसी का नाम और फोन नंबर भी नहीं है। इसलिए ये शंका पैदा कर रहा है।
माला से पोंछे थे हाथ
कमलनाथ फतवे से पहले भगवान राम की तस्वीर से हाथ पोंछने के मामले में भी विवादों में फंस चुके हैं। 5 अगस्त को राम भगवान की तस्वीर की पूजा करने के बाद उन्होंने माला से हाथ पोंछ लिए थे, जो विधि रूप से अनुचित है।
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