नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में वैसे तो तमाम महान क्रिकेटर हुए हैं. इन क्रिकेटर्स में नवाब पटौदी, कपिल देव, अजीत वाडेकर और सौरव गांगुली जैसे महान कप्तानों में गिने गए खिलाड़ी भी शामिल हैं. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) हमेशा इन महान कप्तानों से भी एक कदम आगे गिने जाएंगे. इसका कारण जानना है तो आपको उनकी कप्तानी और उससे पहले की टीम इंडिया के अंतर को समझना होगा.
Captain
Leader
Legend
Mentor
FriendTributes to MSDhoni have been pouring in from all corners of the cricketing world https://t.co/aJ7wPW1EmL
— ICC (@ICC) August 15, 2020
धोनी की कप्तानी में मिली आईसीसी ट्रॉफियों में सफलता
भारत ने 1932 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था और धोनी को पहली बार कप्तानी करने का मौका 2007 में हासिल हुआ. 1932 से 2007 के बीच के 75 साल लंबे सफर में टीम इंडिया को आईसीसी ट्रॉफियों में महज दो ही बार खिताब जीतने की सफलता हासिल हुई. पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) ने कपिल देव (Kapil Dev) की कप्तानी में 1983 का वर्ल्ड कप जीता तो दूसरी आईसीसी ट्रॉफी सौरव गांगुली की कप्तानी में 2002 में चैंपियंस ट्रॉफी के संयुक्त विजेता के तौर पर हासिल हुई. लेकिन धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2007 से 2013 के बीच यानी महज 7 साल में 3 आईसीसी खिताब जीत लिए.
Captain. Legend. Inspiration.
As former TeamIndia captain @msdhoni retires from international cricket, we wish him the very best and thank him for the wonderful memories. ThankYouMSDhoni pic.twitter.com/ks70z4FYNL
— BCCI (@BCCI) August 16, 2020
तीनों आईसीसी खिताब जीतने वाले इकलौते कप्तान
माही ने 2007 में टीम इंडिया को पहले टी20 वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाया तो 2011 में धोनी ने आखिरी ओवर में हैलिकॉप्टर शॉट से छ्क्का लगाकर 28 साल बाद टीम इंडिया की झोली में दोबारा आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप खिताब डाल दिया. इसके बाद धोनी की ही कप्तानी में टीम इंडिया ने इंग्लैंड की धरती पर 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी अपने नाम की. वह तीनों आईसीसी खिताब जीतने वाले आज तक दुनिया के इकलौते कप्तान हैं. यह महज संयोग नहीं कहा जा सकता कि धोनी के कप्तानी छोड़ने के बाद विराट कोहली (Virat Kohli) की कप्तानी में टीम इंडिया ने टेस्ट, वनडे और टी20 की द्विपक्षीय सीरीजों में तो सफलता के कीर्तिमान गढ़े हैं, लेकिन आईसीसी ट्रॉफियों में विराट का नेतृत्व पिछड़ता ही दिखाई दिया है. यह कही न कहीं आईसीसी ट्रॉफियों के लिए आवश्यक सोच और प्लानिंग का अंतर है, जो धोनी में विराट ही नहीं टीम इंडिया की कप्तानी कर चुके सभी क्रिकेटर्स से अलग था.
कैप्टन कूल की कप्तानी में ही पहली बार बने नंबर-1
महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही टीम इंडिया के खाते में वो बेस्ट मूमेंट भी दर्ज किया गया था, जिसका इंतजार हर टीम को रहता है. ये मूमेंट था रैंकिंग में नंबर-1 कहलाने का. नवंबर, 2009 में टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 बनी और अगस्त, 2011 यानी 21 महीने तक यह पायदान उसी के कब्जे में रही. इस दौरान टीम इंडिया ने लगातार 9 वनडे मैच जीतने का भी कारनामा किया, जो आज तक किसी भी भारतीय कप्तान का लगातार वनडे जीत का रिकॉर्ड है.
दुनिया में सबसे ज्यादा मैच में कप्तानी
धोनी के नाम पर टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल में मिलाकर सबसे ज्यादा मैचों में टीम का नेतृत्व करने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. माही ने 332 मैचों में कप्तानी की थी, जिनमें उन्होंने 53.61 का विजय प्रतिशत हासिल करते हुए 178 जीत 120 हार और 6 टाई मैच का रिकॉर्ड कायम किया था. धोनी के बाद सबसे ज्यादा मैच में कप्तानी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग के नाम पर है, जिन्होंने 324 मैच में कप्तानी की थी. कप्तान के तौर पर धोनी का रिकॉर्ड 60 टेस्ट मैच में 27 जीत, 18 हार व 15 ड्रॉ, 200 वनडे मैच में 110 जीत, 74 हार, 5 टाई और 11 रद्द तथा 72 टी20 मैच में 41 जीत, 28 हार, 1 टाई और 2 रद्द का रहा है.
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