बासमती चावल के जीआई टैग को लेकर सियासत तेज हो गई है.
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-Election) से पहले सियासत तेज है और आरोप-पत्यारोपों का दौर भी जारी है. अब किसानों को साधने बासमती चावल को जीआई टैग मिलने को लेकर सियासत हो रही है.
कृषि मंत्री कमल पटेल ने यह भी कहा है कि 15 महीनों तक मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार दिग्विजय सिंह के इशारे पर चल रही थी. तब दिग्विजय सिंह ने जीआई टैग का मुद्दा आखिरकार क्यों नहीं उठाया. कमल पटेल की मानें तो मध्य प्रदेश सरकार बासमती चावल को जी आई टैग दिलाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है कांग्रेस को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए.
दिग्विजय ने शिवराज को लिखा था खत
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जीआई टैग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि उन्हें समाचार पत्रों से जानकारी मिली है कि प्रदेश में बासमती धान का उत्पादन करने वाले किसानों के प्रति आप(शिवराज) एकाएक बहुत चिंतित और विचलित हो रहे हैं. आपकी वेदना है कि प्रदेश के किसानों द्वारा पैदा की जा रही बासमती को अभी तक एपीडा संस्था से जीआई टैग नहीं मिल पा रहा है. आप प्रदेश के किसानों के इतने बड़े शुभचिंतक हैं. दिसम्बर 2003 से लेकर विगत सवा साल छोड़कर करीब सोलह साल से आप की प्रदेश में सरकार है. बासमती की टैगिंग को लेकर आपने बयानबाजी के सिवा कुछ नहीं किया. यही नहीं भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार को सातवां साल चल रहा है. अब तक टैग क्यों नहीं दिला सके.क्या है मामला ?
मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने की प्रक्रिया चल रही है. इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मध्य प्रदेश के बासमती चावल की जीआई जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैगिंग देने पर नाराजगी जताई थी. इस सिलसिले में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की थी. इसी पर एमपी सरकार ने नाराजगी जताई और सीएम शिवराज ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर कमलनाथ से पूछा था कि कांग्रेस बताए वो पंजाब के किसानों के साथ है या एमपी के किसानों के साथ.