UGC Final Year Exams Live Updates| Supreme Court Decision On Final Year Or Semsester Exams; Supreme court Hearing on UGC Guidelines for Final Year Exams today | फाइनल ईयर और सेमेस्टर परीक्षाएं कराने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, यूजीसी की एग्जाम गाइडलाइन के खिलाफ हैं स्टूडेंट्स और राज्य सरकारें

UGC Final Year Exams Live Updates| Supreme Court Decision On Final Year Or Semsester Exams; Supreme court Hearing on UGC Guidelines for Final Year Exams today | फाइनल ईयर और सेमेस्टर परीक्षाएं कराने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, यूजीसी की एग्जाम गाइडलाइन के खिलाफ हैं स्टूडेंट्स और राज्य सरकारें


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3 मिनट पहले

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  • मामले में यूजीसी और सरकार की ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे हैं पक्ष
  • न्यायधीश जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच मामले में कर रही है सुनवाई

फाइनल ईयर और सेमेस्टर की परीक्षाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर जारी यूजीसी की गाइडलाइन को चुनौती देती याचिका पर न्यायधीश जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली जस्टिस सुभाष रेड्‌डी और जस्टिस एमआर शाह की बेंच सुनवाई कर रही है। इससे पहले 14 अगस्त को कोर्ट ने अपना फैसला 18 अगस्त तक के लिए टाल दिया था।

यूजीसी और सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे हैं, जबकि छात्रों का पक्ष डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पैरवी एडवोकेट अरविंद दातार कर रहे हैं।

मंगलवार कोर्ट रूम Live

कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की ओर से दलील:

कोर्ट में सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार की ओर पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने कहा कि, हमारा राज्य बहुत कोरोना प्रभावित है। ऐसे में हमारे सामने परीक्षाएं कराने में व्यावहारिक समस्याएं हैं। दातार ने कहा कि, यूजीसी राज्यों पर परीक्षाएं कराने का दबाव नहीं बना सकता।

उन्होंने इसके लिए राज्य और केंद्र की शक्तियों को हवाला भी दिया। इस पर जस्टिस शाह ने उन्हें टोकत हुए कहा- इस मामले में यूजीसी परीक्षाएं नहीं करा रहा है, परीक्षाएं कराना यूनिवर्सिटीज का काम है। आप ऐसा नहीं कह सकते कि यूजीसी परीक्षाएं कराता है।

हम कोर्टरूम में चल रही सुनवाई को लगातार अपडेट कर रहे हैं…

पिछली सुनवाई में क्या?

सरकार ने कहा- UGC को नियम बनाने का अधिकार

सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में कहा कि फाइनल ईयर की परीक्षा कराना ही छात्रों के हित में है। सरकार और UGC का पक्ष कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे थे। उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट से यह भी कहा कि परीक्षा के मामले में नियम बनाने का अधिकार UGC को ही है।

राज्यों के पास परीक्षा रद्द करने की शक्ति नहीं

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुंबई और दिल्ली राज्यों की तरफ से दिए गए एफिडेविट यूजीसी की गाइडलाइंस से बिल्कुल उलट हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जब UGC ही डिग्री जारी करने का अधिकार रखती है। तो फिर राज्य कैसे परीक्षाएं रद्द कर सकते हैं?

UGC की दलील- स्टैंडर्ड खराब होंगे

इससे पहले यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फाइनल ईयर की परीक्षा रद्द करने का दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार का फैसला देश में उच्च शिक्षा के स्टैंडर्ड को सीधे प्रभावित करेगा। दरअसल, यूजीसी के सितंबर के अंत तक फाइनल ईयर की परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ जारी याचिका पर कोर्ट में जवाब दिया।

क्या है स्टूडेंट्स की मांग

दायर याचिका में स्टूडेंट्स ने फाइनल ईयर की परीक्षा रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही स्टूडेंट्स ने आंतरिक मूल्यांकन या पिछले प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नत करने की भी मांग की है। इससे पहले पिछली सुनवाई में, यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा था कि राज्य नियमों को बदल नहीं सकते हैं और परीक्षा ना कराना छात्रों के हित में नहीं है। 31 छात्रों की तरफ से केस लड़ रहे अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा है कि, हमारा मसला तो यह है कि UGC की गाइडलाइंस कितनी लीगल हैं।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने परीक्षाओं पर लगाई रोक

दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फाइनल ईयर परीक्षाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक राज्य में परीक्षाओं पर रोक लगा दी है। 6 जुलाई को जारी गाइंडलाइंस में यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में फाइनल ईयर या सेमेस्टर की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक कराने के निर्देश दिए गये थे। वहीं, फैसले के बाद से ही स्टूडेंट्स फिजिकली परीक्षा आयोजित कराने का लगातार विरोध कर रहे हैं।

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