भोपाल में इस तरह की साड़ियों की सेल भी शुरू हो गईं हैं.
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार में हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम ने विशेष मसालों का उपयोग कर साड़ियां बनाई हैं. दावा किया जा रहा है कि ये महिलाओं के लिए इम्युनिटी बूस्टर (Immunity booster) का काम करेंगी.
मध्य प्रदेश में हर्बल साडिय़ां और इम्युनिटी बूस्टर साडिय़ां तैयार की जा रही हैं, जिसे आयुर्वस्त्र का नाम दिया गया है. इन साड़ियों की खास बात है इनको तैयार करने का तरीका. इसे बनाने के लिए कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य तौर पर लौंग, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, चक्रफूल, जावित्री, दालचीनी, काली मिर्च, शाही जीरा, तेज पत्ता ये मसाले इस्तेमाल में लाए जाते हैं. इन मसालों को एक साथ लोहे के बड़े बर्तनों में बारीकी से कूटा जाता है.
इस विधि से बनी हैं साड़ियां
48 घंटे से ज्यादा समय तक इन मसाले की पोटली को पानी में रखकर एक भट्टी पर औषधी युक्त पानी की पोटली रखकर इसकी भाप से वस्त्र बनाने वाले कपड़े को घंटों तक ट्रीट किया जाता है. यहां साड़ियां कई पड़ाव और बारीकियों से गुजारी जाती है, तब कहीं जाकर ये इस्तेमाल के लिये तैयार होती हैं.जान के आपको हैरत होगी लेकिन एक साड़ी बनने में करीब 5 से 6 दिन का समय लगता है.इम्युनिटी पावर का असर
इन साड़ियों को खरीदने के बाद ऐसा नहीं है आप जब इन्हे पहनेंगी तो इम्युनिटी बढ़ती रहेगी. असल में कई तरह के मसालो से ट्रीट की गई साड़ियों का असर 4 से 5 धुलाई तक ही रहता है. ऐसे में ग्राहक को सलाह दी जाती है कि, वो इनकी धुलाई के लिए कम से कम कैमिकल युक्त पावडर का इस्तेमाल करें तोकी इसका असर ज्यादा दिनों तक बना रहे. इन साडिय़ों की कीमत 3 से 5 हजार रुपए के बीच है. अभी ये साडिय़ां केवल भोपाल और इंदौर के मृगनयनी स्टोर्स पर ही मिल रही हैं, लेकिन जल्द ही देश के अन्य राज्यों में स्थित एमपी के मृगनयनी स्टोर्स पर उपलब्ध होंगी.
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आयुर्वस्त्रों को लॉच करने का मकसद
एमपी सरकार में हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम के कमिश्नर राजीव शर्मा ने न्यूज़ 18 को बताया कि ‘अलग-अलग प्रिंट की इन साड़ियों के प्रयोग के जरिये यंग जनरेशन की पुरानी परंपराओं से रू-ब-रू कराना है. वर्तमान स्थिती में प्राचीन काल के ऋषि मुनियों ने स्वास्थ्य और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले वस्त्रों की प्राचीन विद्या और परंपरा को जीवित करने का मौका मिला है, वो भी तब जब एक वारयस देश-विदेश में अपना कहर बरसा रहा है.शर्मा ने बताया की फिलहाल इन साड़ियों का विक्रय भोपाल और इंदौर में किया जा रहा है, लेकिन आगामी दिनों में इसे देश के हर शहर तक पहुंचाने का लक्ष्य है.उन्होने ने बताया की संक्रमण से बचे रहने का ये एक प्राचीन उपाय है. कोरोना के चलते पहले इसपर करीब 2 महीने ट्रायल किया गया. इसके बाद सटीक हल निकला और इन मसालों का मिश्रण तैयार किया गया और फिर जाकर आयुर्वस्त्रों को तैयार किया गया.