Mandsaur : शिव मंदिर के गर्भगृह में बाढ़ का पानी घुसने को माना जाता है शुभ | mandsaur – News in Hindi

Mandsaur : शिव मंदिर के गर्भगृह में बाढ़ का पानी घुसने को माना जाता है शुभ | mandsaur – News in Hindi


अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ के चार मुख पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं. (फाइल फोटो)

इस बार मंदसौर (Mandsaur) में जब शिवना नदी (Shivna River) में बाढ़ आई और शिवना नदी की बाढ़ का पानी मंदिर के गर्भगृह में घुसा तो उसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया.

मंदसौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर (Mandsaur) में भगवान पशुपतिनाथ महादेव (Pashupatinath Mahadev) के मंदिर (temple) में बारिश के दिनों में जब बाढ़ (Flood) का पानी मंदिर के गर्भ गृह में घुसता है, तो उसे शुभ माना जाता है. इस बार मंदसौर में जब शिवना नदी में बाढ़ आई और शिवना नदी की बाढ़ का पानी मंदिर के गर्भगृह में घुसा तो उसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया. लंबे समय से ऐसी मान्यता है कि जब भी शिवना नदी (Shivna River) की बाढ़ का पानी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है, तो वह प्रदेश के लिए शुभ होता है. माना जाता है कि शिवना नदी स्वयं भगवान शिव के चरण पखारने के लिए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करती है.

चार मुख पूरी तरह जलमग्न

मंदसौर में 2 दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण शिवना नदी उफान पर है. शिवना नदी की बाढ़ का पानी पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में घुस गया है. यहां की 7 फीट ऊंची प्रतिमा पानी में आधी डूब गई है. अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ के चार मुख पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं. पशुपतिनाथ मंदिर सील कर दिया गया है. मंदिर में श्रद्धालु का प्रवेश बंद कर दिया गया है. लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण शिवना और चंबल नदी में उफान आ गया है.

क्षेत्र में खुशहाली की उम्मीदमंदिर के गर्भ गृह में पानी घुसने के कारण पशुपतिनाथ भगवान की आरती बाहर से ही की गई.
पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के पुजारी आचार्य सुरेंद्र ने बताया कि इस बार पूरी सीजन में बारिश नहीं हुई थी और पहली बार शिवना नदी उफान पर है और शिवना नदी का पानी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया है. इसे शुभ माना जाता है. शिवना मैया ने खुद भगवान शिव के चरण पखारे हैं, इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी सभी जलस्रोत पानी से लबालब हो जाएंगे. अच्छी फसल होगी और क्षेत्र में खुशहाली आएगी.





Source link