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इंदौर5 मिनट पहले
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तबीयत खराब होने पर जवान को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
- सोलंकी काे 6 महीने पहले ट्रैफिक विभाग से आजाद नगर थाने में स्थानांतरित किया गया था
- 20 अप्रैल को तबीयत खराब होने हुई थी, 23 अप्रैल को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था
आजाद नगर थाने में पदस्थ पुलिस कांस्टेबल की शुक्रवार को निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उन्हें पीलिया हो गया था। दो दिन पहले उनकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। परिजन ने विभागीय अफसरों को कोरोना से मौत होने की बात कही। हालांकि, अफसरों को डॉक्टरों ने लीवर डैमेज होने की बात कही।
डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कांस्टेबल राकेश सोलंकी (40) सुयश हॉस्पिटल में भर्ती थे। उन्हें 6 महीने पहले ट्रैफिक विभाग से आजाद नगर थाने में स्थानांतरित किया गया था। सोलंकी 20 साल से पुलिस सेवा में थे। 20 अप्रैल को उनकी तबीयत खराब हुई थी। लीवर में पीलिया बढ़ने के बाद उन्हें 23 अप्रैल को निजी अस्पताल में भर्ती किया था। उपचार के बाद वह ठीक हो गए थे। बाद में फिर तबीयत बिगड़ी तो परिजन ने 30 अगस्त को दोबारा सुयश हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया, लेकिन इसकी सूचना उन्होंने नहीं दी। हालांकि अभी जितने भी मरीज हॉस्पिटल में भर्ती हो रहे, उन सभी की कोविड जांच की जाती है। शुक्रवार को सोलंकी की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। बताते हैं कांस्टेबल के भाई की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। इसलिए परिजन कोविड से ही मौत होने की बात कर रहे हैं।
रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद परिजन को शव नहीं सौंपा
डीआईजी ने मामले में मेडिकल ओपिनियन के बाद एक्शन लेने की बात कही। वहीं, रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कांस्टेबल का शव परिजन को नहीं सौंपा गया। साथी पुलिसकर्मियों ने बताया सोलंकी की बड़ी बेटी 11 साल की और छोटी बेटी 4 साल की है।
गरीबों में आ गई हार्ड इम्युनिटी, अब अमीर और मध्यम वर्ग से आ रहे मरीज- कलेक्टर
अब ज्यादातर मरीज मध्यम वर्गीय और उच्च वर्गीय आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि गरीबों में अब रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो गई है। अमीर और मध्यम वर्ग के लोग निजी अस्पताल में इलाज करवाना चाहते हैं। सरकारी अस्पताल व सुपर स्पेशिएलिटी में भी अच्छा काम हो रहा है। यह बात कलेक्टर मनीष सिंह ने शुक्रवार को रविंद्र नाट्य गृह में सर्वे टीम व अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कही। कलेक्टर ने कहा कि हमें डबल मास्क में रहना चाहिए और सैनिटाइजर का उपयोग करना चाहिए।
जेल में तीन दिन में 50 से ज्यादा कैदी आए पॉजिटिव
जिला जेल में तीन दिन में 50 कैदियों व स्टाफ के कोरोना पॉजिटिव होने से हड़कंप है। जांच में पता चला है कि खंडवा की एक महिला कैदी के कारण इंदौर जेल में कोरोना फैला था। उसे बिना जांच किए इंदौर भेजा गया था। डीआईजी संजय पांडे उसे इंदौर लेकर आए थे। जब तक उसकी रिपोर्ट आई तब तक देर हो चुकी थी, उसे कैदियों के वार्ड में शिफ्ट किया जा चुका था। उसी के कारण संक्रमण फैला। पूरे वार्ड को सैनेटाइज करवा दिया गया है, फिर भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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