नई दिल्ली: क्रिकेट के बारे में बात हो और सचिन तेंदुलकर का नाम न आए तो कुछ अधुरा सा लगता है, ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ कहे जाने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए है जिनमें कुछ तो अभी तक कायम हैं. इस बेहतरीन खिलाड़ी को बचपन से उनके कोच रमाकांत आचरेकर ने तराशा है. सचिन कहते है कि उन्होंने क्रिकेट ही नहीं बल्कि उन्हें जिंदगी से जुड़ी भी कई सीख दीं है.
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रमाकांत आचरेकर का सचिन तेंदुलकर को एक शानदार क्रिकेटर बनाने में अहम रोल रहा है. कोच रमाकांत आचरेकर ने सचिन को 11 साल की उम्र में बांद्रा स्थित न्यू इंग्लिश हाई स्कूल से शारदाश्रम विद्या मंदिर स्कूल में जाने का सुझाव दिया था, ताकि वो क्रिकेट को ज्यादा समय दे सके. वहीं कोच आचरेकर का कोचिंग का तरीका बिल्कुल अलग था. जब वह ट्रेनिंग के लिए जाते थे तो आचरेकर स्टंप के ऊपर एक रुपए का सिक्का रख देते थे.
Ended my day with paying respects to Achrekar Sir at his Shivaji Park residence. pic.twitter.com/q3vWbSgYy5
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) January 3, 2020
उस सिक्के को पाने के लिए वह शर्त रखते थे कि जो सचिन को आउट करेगा, यह सिक्का उसे मिलेगा. और सचिन अगर आउट नहीं हुए तो सिक्का खुद सचिन का हो जाएगा. तेंदुलकर ने इस तरह से एक रुपए के 12 सिक्के जीते है और इन्हें आज भी सहेज कर अपने पास रखा हुआ है, जो उनके लिए किसी मेडल से कम नहीं. आचरेकर के इस चैलेंज ने सचिन को किसी भी सूरत में अपना विकेट ना गंवाने के काबिल बनाया.
इसके अलावा सचिन को बड़ा बल्लेबाज बनाने के लिए कोच आचरेकर ने उन्हें और भी कई चैलेंज दिए है. एक बार सचिन ने कोच आचरेकर को घर पर डिनर का न्योता दिया तो उन्होंने शतक लगाने की सूरत पर ही घर पर आने की बात कही. बड़ी बात ये है कि सचिन ने शतक लगाया और फिर कोच आचरेकर को घर पर डिनर कराया. सचिन इस घटना को अपनी जिंदगी के सबसे बड़े लम्हों में से एक मानते हैं.
Teachers impart not just education but also values. Achrekar Sir taught me to play straight – on the field and in life.
I shall always remain grateful to him for his immeasurable contribution in my life.
His lessons continue to guide me today. #TeachersDay pic.twitter.com/kr6hYIVXwt— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) September 5, 2019
बता दे कि सचिन के अलावा इस रमाकांत आचरेकर ने विनोद कांबली, प्रवीण आमरे, अजीत अगरकर, रमेश पोवार जैसे खिलाड़ियों को भी कोचिंग दी है. रमाकांत आचरेकर को 1990 में प्रतिष्ठित ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ और 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. आचरेकर का 87 वर्ष की उम्र में 2 जनवरी 2019 को निधन हो गया था.