कलेक्टर की जांच में भ्रष्टाचार के अपराध का मामला सामने आया है. (सांकेतिक तस्वीर)
बड़वानी कलेक्टर (Barwani Collector) शिवराज सिंह वर्मा ने बताया कि 2010 में इंदिरा सागर परियोजना की नहर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य किया गया था, जिसका मुआवजा को लेकर जमकर भ्रष्टाचार किया गया.
बड़वानी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने बताया कि 2010 में इंदिरा सागर परियोजना की नहर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य किया गया था, जिसमें शरद चंद्र रावत निवासी बड़वानी की जमीन भी अधिग्रहित की जाना थी, जिसका नियमानुसार मुआवजा भी भू अर्जन कर दिया जाना था, जिसको लेकर तात्कालीन एसडीएम के रीडर बाबूलाल मालवीय के साथ मिलकर शरद चंद्र रावत, प्रितेश रावत और रीडर की बहन कलाबाई ने मिलकर एक साजिश रचते हुए मुआवजे की राशि को बढ़ाने के लिए एक प्लान तैयार किया. इसमें भू अर्जन होने वाली जमीन का नियम के विरुद्ध मैरिज गार्डन के लिए डायवर्शन किया.
इस तरह किया भ्रष्टाचार
कलेक्टर ने बताया कि आरोपी कलाबाई के नाम पर डायवर्सन होने के बावजूद कृषि भूमि की रजिस्ट्री असिंचित भूमि बताकर की उसकी रजिस्ट्री करा दी, जिसमें स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई. यही नहीं नियम के विरुद्ध जाकर उस जमीन का बंटवारा करते हुए अपने पुत्र और कलाबाई कलाल के नाम से बंटवारा भी कर दिया गया. बटवारा भी नियमानुसार तहसीलदार के द्वारा किया जाना था, लेकिन उसे भी तात्कालीन भू अभिलेख के अधीक्षक से करा लिया गया. इन्हीं सभी दस्तावेजों को आधार बनाकर रेफरेंस में न्यायालय जाकर 34 लाख रुपए के अवार्ड के बदले 8 करोड़ का मुआवजा दिए जाने का आदेश जारी किया गया. मामले में अब तक की जांच में तत्कालीन रीडर बाबूलाल मालवीय एसडीओ राजस्व, अधीक्षक भू-अभिलेख, जमीन मालिक शरद चंद्र रावत, उनके बेटे प्रितेश रावत और रीडर की बहन कलाबाई कलाल की मिलीभगत सामने आई है.