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- Bhopal MP Sadhvi Pragya Called Digvijay Singh Ungodly Without Naming Him; She Said The Public Was Able To Ask For Such Killed Water Too
भोपाल15 मिनट पहले
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सांसद साध्वी प्रज्ञा का हिंदूवादी संगठनों ने सम्मान किया था, इस मौके पर उन्होंने नगर निगम की जमकर खबर ली।
- हिंदू संगठनों द्वारा सांसद प्रज्ञा का सम्मान किया गया
- नगर निगम भोपाल को भी खरी-खोटी सुनाई
भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर अक्सर दिग्विजय सिंह को अपने निशाने पर लेती रही हैं। उन्होंने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह को अधर्मी और 15 महीने रही कांग्रेस सरकार को अनीति की सरकार बता दिया। उन्होंने कहा ‘भोपाल में हमें क्यों लाया गया है, यह आपको याद होगा। ऐसा कहा जाता है जब सियार की मौत आती है तो शहर की तरफ भागता है। यहां अधर्मियों ने आकर टिकने का प्रयास किया था। 15 महीने तक यहां कुशासन था, उन्होंने अधर्म को लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन भोपाल के हमारे हिंदुओं ने ऐसी मार मारी कि पानी भी नहीं मांग पाए। इसलिए ऐसे दुर्नीति पर चलने वाले लोगों की राजनीति खत्म कर दो।’
भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का रविवार को हिंदू संगठनों ने का सम्मान किया था। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रमों में रोक-टोक को लेकर उन्होंने नगर निगम भोपाल को भी जमकर खरी खोटी सुनाई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तर्पण हमारे पुरखों की जीवनदायिनी शक्ति होती है, हम नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे लेकिन हमारी पद्धतियों को छोड़ेंगे नहीं।
शीतलदास की बगिया में ताला खुलवाया: प्रज्ञा
भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘शीतलदास की बगिया में ताला लगा दिया था, लोग तर्पण नहीं कर पा रहे थे। मैंने नगर निगम कमिश्नर से कहकर ताला खुलवाया, लेकिन टीआई तलैया थाना ने दूसरी जगह रोक लगा लगा दी, जबकि वहां पहले से ही तर्पण हो रहा था। नगर निगम प्रशासन आगे से सचेत हो जाए। अगर प्रशासन संवेदनहीन हो रहा है तो हमें दूसरी तरह से भी चलना आता है।’
प्रज्ञा ने मुख्यमंत्री से नगर को सचेत करने की अपील की
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से नगर निगम प्रशासन को सचेत कर रही हूं और मुख्यमंत्री से अपील करती हूं कि ऐसे समय मे संवेदनशील हो जाइए। नगर निगम प्रशासन को सचेत कर दीजिए। उन्होंने कहा कि जब हिन्दू खड़ा होता है तो विश्व मे शांति होती है और जब हिन्दू परेशान और दुखी होता है तो विश्व मे हाहाकार मच जाता है। इसलिए हिन्दू, हिंदुस्तान और हिंदी का संरक्षण हमें करना ही होगा।
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