माशिमं ऐप से सोमवार से ऑनलाइन क्लासेस शुरू होने वाली थी.
स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) और एमपी बोर्ड (MP Board) की आपसी विवाद के कारण माशिमं ऐप से ऑनलाइन क्लासेस (Online Classes) की शुरुआत नहीं हो पाई. फिलहाल इसे रद्द कर दिया गया है.
अधिकारियों के विवाद में पिस रहे छात्र
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई माध्यमिक शिक्षा मंडल माशिमं ऐप से कराने जा रहा था. दूरदर्शन से ऑनलाइन क्लासेस को लेकर करार भी हुआ था. जिसके तहत सोमवार सुबह 7 बजे से ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत की जानी थी. लेकिन अधिकारियों के विवाद के चलते ऑनलाइन क्लासेस को फिलहाल रद्द कर दिया गया है.
नई शिक्षा नीति के तहत एमपी बोर्ड ने माशिमं ऐप से पढ़ाई करने की तैयारी की थी. जिसके तहत छात्र-छात्राओं का आंतरिक मूल्यांकन किया जाना था. वहीं माशिमं ऐप से छात्र-छात्राओं को पेपर भी भेजा जाना था. ओपन बुक प्रक्रिया से छात्र-छात्राओं की परीक्षा ली जानी थी. लेकिन इसकी शुरुआत होने से पहले ही देर रात स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर ऑनलाइन क्लासेज को रद्द कर दिया है.शिक्षा मंत्रा से लेकर सीएम तक पहुंचा मामला
एमपी में अब अधिकारियों के विवाद का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. यानि ऑनलाइन क्लासेस को लेकर अब तक सारे आदेश स्कूल शिक्षा विभाग ही जारी करता है, लेकिन आईएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया के एमपी बोर्ड के चेयरमैन का पदभार संभालने के बाद ही एमपी बोर्ड में ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत करने की तैयारी की थी. एमपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर ही रूपरेखा तैयार करती है. ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग से परामर्श किए बिना माशिमं ऐप से पढ़ाई कराने का आदेश स्कूल शिक्षा विभाग को रास नहीं आया. इसके बाद ये मामला मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री तक पहुंचा. अधिकारियों के बीच सामंजस्य न बैठने के चलते ही ऑनलाइन पढ़ाई के आदेश को ही रद्द कर दिया गया है.
बोर्ड परीक्षाओं को मद्देनजर शुरू होने वाली थी क्लासेस
कोरोना संकट काल के चलते स्कूल बंद होने से इस बार प्रदेश भर में ऑनलाइन क्लासेस जारी है. तिमाही और छमाही परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकी हैं. एमपी बोर्ड ने मुख्य परीक्षाओं के आयोजन से पहले बोर्ड परीक्षाओं को लेकर ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत करने की रूपरेखा तैयार की थी. जिससे मुख्य परीक्षाओं से पहले छात्रों की पूरी तैयारी हो सके. इसके लिए कोर्स को 12 यूनिट में बांटा गया था. हर यूनिट के पूरा होने पर आंतरिक मूल्यांकन का समय भी तय किया गया था. लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के परामर्श के बिना एमपी बोर्ड के द्वारा आदेश जारी करने पर विवाद खड़ा हो गया है.