कुछ दिन पहले ही आरोपी प्यारे मियां को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
केस में नाबालिग लड़कियों के बयान को आधार कर ही राज्य बाल संरक्षण आयोग (State Child Protection Commission) ने पुलिस (Police) की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे.
राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बृजेश चौहान ने बताया कि घटना के बाद आयोग की एक टीम गोरवी संस्थान में पहुंची थी. यहां पर लड़कियों के टीम ने बयान लिए थे. उन्होंने इस दौरान टीम में शामिल महिला सदस्य को यह बताया था कि घटना वाले दिन के दूसरे दिन आरोपी प्यारे मियां रातीबड़ थाने पहुंचा था. प्यारे मियां के साथ एक नाबालिग लड़की की नानी भी मौजूद थी. आरोपी थाने आया था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया.
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पुलिस पर उठाए थे सवालइस बयान के बाद आयोग ने रातीबड़ थाना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए और डीजीपी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी भी लिखी थी. साथ ही पुलिस से इस पूरे मामले में रिपोर्ट भी मांगी थी. आयोग ने लड़कियों के बयान के आधार पर थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में आयोग की टीम ने फिर से लड़कियों से बातचीत की और आरोपी प्यारे मियां के आने की बात को पूछा तो लड़कियां अपने बयान से पलट गईं. उन्होंने कहा कि उन्होंने थाने में आरोपियों को नहीं देखा घटना के बाद उन्होंने घबराहट में इस तरीके का बयान दिया था.
पुलिस की रिपोर्ट भी मिली
आयोग को पुलिस विभाग की तरफ से इस मामले की रिपोर्ट भी मिल गई है. आयोग ने पुलिस ने जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी. पुलिस ने कई बिंदुओं पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजी है. सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने प्यारे मियां के थाने में आने की बात को साफ तौर से इंकार किया है. रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे में आरोपी प्यारे मियां नहीं आया है और घटना के बाद वह थाने नहीं आया था. यदि आरोपी थाने आता तो उसे जरूर गिरफ्तार किया जाता. घटना के बाद से आरोपी फरार था और पुलिस की अलग-अलग टीम तत्काल घटना का पता चलने के बाद उसकी तलाश कर रही थी. इतना ही नहीं नाबालिग लड़कियों से जुड़ा मामला होने की वजह से चाइल्डलाइन टीम को सूचना दी गई थी. बता दें कि प्यारे मियां पर नाबालिगों से रेप, धोखाधड़ी समेत कई केस दर्ज हैं.