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- The Death Of The Head Teacher Who Aroused Education In The Corona Period; Hamidia Was Hospitalized
भोपाल22 मिनट पहले
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भोपाल में गुरुवार को कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शाला बरखेड़ा नाथू के प्रधानाध्यापक प्रशांत सिंह चंदेल की मौत हो गई। राज्य अध्यापक संगठन के संयोजक उपेंद्र कौशल ने उन्हें कोरोना वॉरियर घोषित करने की मांग की है।
- शिक्षक की गुरुवार को सुबह हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत
- अध्यापक प्रशांत सिंह चंदेल की पत्नी आभा सिंह भी सरकारी शिक्षक हैं
कोरोना काल में शिक्षा की अलख जगाने वाले प्रधानाध्यापक प्रशांत सिंह चंदेल की संक्रमण से मौत हो गई है। उन्होंने गुरुवार को हमीदिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। शासकीय माध्यमिक शाला बरखेड़ा नाथू में पदस्थ प्रधान अध्यापक प्रशांत सिंह चंदेल की पत्नी आभा सिंह भी सरकारी शिक्षक हैं और वह बाबे अली माध्यमिक शाला पढ़ाती हैं। कोरोना से राजधानी में अब तक 350 से अधिक कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई है।
शिक्षक प्रशांत सिंह चंदेल पिछले सप्ताह ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और हमीदिया अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। जहां पर आज सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शिक्षक प्रशांत सिंह चंदेल दो महीने से चल रहे शिक्षा विभाग के कार्यक्रम ‘हमारा घर हमारा विद्यालय’ के तहत घर-घर संपर्क और घर-घर पढ़ाई के साथ ही मोहल्ला क्लास संचालित करके बच्चों को पढ़ा रहे थे।

प्रशांत सिंह चंदेल ने पूरे कोरोना काल के दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए गली-गली और मोहल्लों में गए। इस दौरान वह कोरोना पॉजिटिव हो गए।
शासकीय अध्यापक संगठन के प्रदेश संयोजक उपेंद्र कौशल ने बताया कि प्रशांत सिंह चंदेल को कोरोना वॉरियर घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। उन्होंने शिक्षक का कर्तव्य निभाते हुए शासन के आदेशों का पालन करते हुए ये कब कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इन्हें इसकी जानकारी खुद नहीं हो पाई। जब 4 सितंबर को जब उन्होंने अपना कोविड टेस्ट कराया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकली और उन्हें हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशांत सिंह जी की मौत शासन की विसंगतिपूर्ण नीतियों की वजह से हुई है। शिक्षक की मौत से शिक्षकों के विभाग के प्रति आक्रोश है। उन्होने तत्काल दिवंगत शिक्षक को कोरोना योद्धा का दर्जा प्रदान कर समस्त शासकीय सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
शिक्षकों को मिले कोरोना योद्धा का दर्जा: प्रदेश संयोजक
राज्य संयोजक उपेंद्र कौशल ने बताया कि पिछले कई महीनों से शासन से मांग करते आ रहे हैं कि शासन की जो विसंगति पूर्ण योजना और कार्यक्रम है। इससे शिक्षकों, पालकों और बच्चों में कोरोना संक्रमण होने का खतरा है। इसलिए विषम परिस्थितियों में काम करने वाले शिक्षकों को अन्य कर्मचारियों की भांति कोरोना योद्धा का दर्जा दिया जाए। शासन द्वारा मिलने वाली समस्त आर्थिक लाभ भी उनको प्रदान किया जाएं, जिससे वह अपना और अपने परिवार का ध्यान रख सकें।
सच्चाई ये है कि शासन ने आज तक शिक्षकों की कोई परवाह नहीं की और विसंगति पूर्ण योजनाएं और कार्यक्रम बनाकर इन शिक्षकों को जबरदस्ती कोरोना महामारी में और मोहल्ला क्लास, घर घर संपर्क और पढाई कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
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