1100 tubewells dug in the area of departmental minister in five months | पांच महीने में विभागीय मंत्री के इलाके में खोदे 1100 ट्यूबवेल

1100 tubewells dug in the area of departmental minister in five months | पांच महीने में विभागीय मंत्री के इलाके में खोदे 1100 ट्यूबवेल


भोपाल42 मिनट पहले

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  • पीएचई विभाग ने मुरैना जिले में 1800 से अधिक नलकूपों का खनन किया

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग ने मात्र 5 महीने में मुरैना जिले में 1800 से अधिक ट्यूबवेल खोद दिए हैं। इनमें से 1100 से ज्यादा नलकूपों का खनन तो विभागीय मंत्री एदलसिंह कंषाना के विधानसभा क्षेत्र सुमावली में हुआ है। विभाग के प्रमुख अभियंता का कहना है कि ये उनकी जानकारी में नहीं है, जबकि क्षेत्र के प्रभारी एसई ने यह जानकारी मुख्यालय भेजी है।

इस मामले में एक पेंच और है। मुरैना जिले में 1800 से ज्यादा ट्यूबवेल का खनन हो गया, लेकिन प्रभारी अधीक्षण यंत्री के अनुसार वहां 780 का ही लक्ष्य था। सूत्रों के अनुसार ग्वालियर-चंबल संभाग में नलकूप खनन के लिए पूरे प्रदेश से सरकारी मशीनें भेजी गई हैं। जबलपुर, उज्जैन, सागर, भोपाल संभाग की मशीनें वहां काम कर रही हैं। पीएचई आमतौर पर साल भर में पूरे प्रदेश में 6 से 7 हजार ट्यूबवेल करता है। इसमें भी एक जिले में अमूमन 400 से ज्यादा नलकूप नहीं खोदे जाते।

एक ट्यूबवेल करने पर 50 हजार से एक लाख रुपए का खर्च आता है। एक बात और ध्यान देने वाली है कि केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन में लोगों के घरों में नल से पानी पहुंचाने की योजना पर जोर है। इसमें नलकूप या हैंडपंप खनन कम से कम करने को कहा गया है।

दिलचस्प पहलू… उपचुनाव वाले क्षेत्रों में ही चल रहा काम
एक दिलचस्प पहलू और है। मुरैना जिले में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से 5 में ही नलकूप खनन की जानकारी दी गई है। ये वही क्षेत्र हैं, जहां उपचुनाव होना हैं। सबलगढ़ को छोड़कर जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी और अंबाह क्षेत्र में यह काम किया गया। विभागीय मंत्री के साथ ही एक अन्य मंत्री गिर्राज दंडोतिया के क्षेेत्र में करीब 300 ट्यूबवेल किए गए हैं।

निर्देश पर चल रहा काम

  • पहले हमने 800 ट्यूबवेल खनन का अनुमान लगाया था, अब दो हजार का अनुमान भेजा है। शासन के निर्देश पर काम चल रहा है। -आरएन करैया, प्रभारी एसई, मुरैना मंडल
  • मुरैना के लिए 780 नलकूप करने का लक्ष्य था। इतने ज्यादा ट्यूबवेल तो नहीं हुए होंगे। – एसके अंधवान, प्रभारी सीई, ग्वालियर परिक्षेत्र
  • यह मेरी जानकारी में नहीं है। प्रगति पूछेंगे तो मालूम पड़ेगा। -केके सोनगरिया, ईएनसी, पीएचई

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