In Pitripaksha, the banks of Gwarighat are dirty, lack of cleanliness; Desperate to reach ancestors by remembering fathers | पितृपक्ष में भी ग्वारीघाट के तट गंदे, साफ-सफाई का अभाव; पितरों को याद कर तर्पण करने हेतु पहुँचने वाले हो रहे मायूस

In Pitripaksha, the banks of Gwarighat are dirty, lack of cleanliness; Desperate to reach ancestors by remembering fathers | पितृपक्ष में भी ग्वारीघाट के तट गंदे, साफ-सफाई का अभाव; पितरों को याद कर तर्पण करने हेतु पहुँचने वाले हो रहे मायूस


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जबलपुर17 घंटे पहले

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ग्वारीघाट

पितृपक्ष चल रहे हैं ऐसे में भी ग्वारीघाट के तट गंदगी से सराबोर हैं। जहाँ भी नजर दौड़ाई जाए वहाँ गंदगी ही गंदगी नजर आती है। इस कोरोना महामारी में अपनी परवाह किए बिना लोग अपने पितरों को याद करने, तर्पण करने ग्वारीघाट जा रहे हैं। लेकिन जब तट गंदे दिखते हैं तो उनका मन दु:खी हो जाता है।

यहाँ मौजूद गंदगी के कारण उन्हें दूसरी बीमारियाँ होने का खतरा लगता है। ग्वारीघाट के उमाघाट से सिद्धघाट के बीच की यदि बात की जाए तो यहाँ प्लास्टिक की बॉटल, फूल मालाएँ, नारियल की जटाओं सहित नर्मदा में बहाए गए बेकार कपड़े यूँ ही पड़े हुए हैं। यह गंदगी लोगों ने नदी में बहाई थी जो तटों का हिस्सा बन गई। पैर रखना भी मुश्किल हो रहा है।

गंदगी की बदबू – तटों पर मौजूद गंदगी की बदबू के बीच यहाँ पूजन के लिए पहुँचने वाले परेशान हो रहे हैं। कचरा पेटी से बाहर कचरा निकल कर तटों पर बिखर रहा है। ऐसा लगता है कि मानों महीनों से तटों की सफाई न हुई हो। यहाँ के दुकानदारों ने बताया कि रोजाना समय से कचरा उठता ही नही हैं। सुबह-शाम अगर साफ-सफाई होती रहे तो ऐसे हालात निर्मित ही न हों।

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