Signal on railway route will be found in one click, there will not be cases of failure. | रेलवे रूट पर सिग्नल एक क्लिक में मिलेगा, फेल्यूअर के मामले नहीं होंगे

Signal on railway route will be found in one click, there will not be cases of failure. | रेलवे रूट पर सिग्नल एक क्लिक में मिलेगा, फेल्यूअर के मामले नहीं होंगे


रतलाम19 घंटे पहले

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रतलाम में नए रिले रूम में स्थापित किया जा रहा है इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग सिस्टम।

  • दिल्ली-मुंबई रूट पर एडवांस इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम बना रहा रेलवे
  • रूट रिले इंटरलाॅकिंग से फिलहाल हो रहा काम

सिग्नल फेल्यूअर को कम करके ट्रेनों को रफ्तार देने के लिए रेलवे रूट रिले इंटरलॉकिंग (आरआरआई) को एडवांस इलेक्ट्राॅनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम (ईआई) में बदल रहा है। पुराने सिस्टम में सिग्नल देने के लिए बटन दबाने पड़ते थे। नए सिस्टम में सिर्फ एक क्लिक करना होगा। खराबी कहां है, यह भी कम्प्यूटर स्क्रीन बता देगा। इसमें भी रेलवे का फोकस ट्रंक रूट दिल्ली-मुंबई पर है। इसके मंडल के हिस्से वाले खाचरौद स्टेशन पर 30 जुलाई को सिस्टम चालू हो गया है। अब रतलाम में बड़े स्तर पर काम प्रारंभ हो गया है। इसके लिए वर्तमान आरआईआई टाॅवर के पास एक नया रिले रूम भी बनाया जा रहा है। नवंबर तक काम पूरा हो जाएगा। रेलवे का टारगेट इस साल ट्रंक रूट के रुनखेड़ा स्टेशन पर भी ईआई सिस्टम लगाने का है।

यह फायदा होगा

स्टेशन और यार्ड में ट्रेनों का संचालन तेजी से हो सकेगा क्योंकि सिग्नल फटाफट चेंज हो जाएंगे। सिग्नल फेल्यूअर की घटनाएं 95 फीसदी तक घट जाएंगी। सिग्नल फेल होने पर उसे ढूंढना नहीं पड़ेगा, रिले रूम की स्क्रीन बता देगी कहां खराबी है। रिले रूम के कर्मचारियों को काम करने में आसानी होगी। सभी पाॅइंट पर हैवी मोटर लगाई गई है, जिससे सिग्नल तेजी से काम करेंगे। मैनपॉवर भी 50 प्रतिशत कम लगेगा। मेंटेनेंस भी कम करना होगा, इससे खर्चा घटेगा।

स्क्रीन पर ही पता चल जाएगी खराबी, ढूंढना नहीं पड़ेगी

यह इंटरलॉकिंग सिस्टम का कंट्रोल रूम होता है। स्टेशन और यार्ड के सभी पाॅइंट और सिग्नल का संचालन रिले रूम से ही होती है। ट्रेन को किस प्लेटफॉर्म पर लेना है, छोड़ने के लिए कब सिग्नल देना है, यह सब रिले रूम से ही होता है। इसके लिए रिले रूम के कर्मचारी स्टेशन स्टॉफ से संपर्क करके सिग्नल देते हैं। अभी स्टेशन के साथ अप व डाउन यार्ड के लगभग 120 से ज्यादा पाॅइंट इसी से कनेक्ट हैं।

नए रूट के स्टेशनों पर यही प्रणाली लग रही

कुछ साल पहले ही ब्राॅडगेज में कन्वर्ट हुए रतलाम-इंदौर और रतलाम-चंदेरिया रूट के सारे स्टेशनों पर इसी सिस्टम से काम हो रहा है। दिल्ली-मुंबई रूट के नागदा से लेकर गोधरा तक के रूट पुराने आरआरआई सिस्टम से ही काम चल रहा था। पांच साल में इस रूट के सभी स्टेशन यह ईआई सिस्टम लग जाएगा।

खाचरौद स्टेशन पर 30 जुलाई को इलेक्ट्राॅनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से काम होने लगा है। रतलाम में काम चल रहा है, जो नवंबर तक पूरा हो जाएगा। दिल्ली-मुंबई रूट के रुनखेड़ा स्टेशन पर भी इसी साल ईआई सिस्टम लगाने का टारगेट है। विनीत गुप्ता, डीआरएम

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