Shardiya Navaratri from 17, will be special for spiritual practice; This time Dussehra and Navami will be worshiped by Goddess on the same day, morning and Ravana in the evening | शारदीय नवरात्रि 17 से, साधना के लिए रहेंगे खास; इस बार दशहरा और नवमी एक ही दिन, सुबह देवी की आराधना और शाम को रावण का होगा दहन

Shardiya Navaratri from 17, will be special for spiritual practice; This time Dussehra and Navami will be worshiped by Goddess on the same day, morning and Ravana in the evening | शारदीय नवरात्रि 17 से, साधना के लिए रहेंगे खास; इस बार दशहरा और नवमी एक ही दिन, सुबह देवी की आराधना और शाम को रावण का होगा दहन


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श्योपुर16 मिनट पहले

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देवी आराधना का पर्व इस बार विशेष संयोगों के साथ आएगा। बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि जैसे खास योग इस बार शक्ति साधना को और महत्वपूर्ण बनाएंगे। देवी भक्तों को माता की आराधना और सिद्धि के लिए अवसर मिलेंगे। नवरात्रि को लेकर प्रशासन ने बेशक पाबंद जारी किए हों लेकिन मंदिरों के अंदर घरों में दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ज्योतिर्विद पं. रमेश चौरसिया के मुताबिक, शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर को पूर्ण होंगे। इसमें बुधादित्य योग, तीन रवि योग, एक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेंगे। इससे नवरात्रि में देवी आराधना करने वालों को सिद्धियां प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। घट स्थापना शनिवार को तुला राशि का चंद्रमा, चित्रा नक्षत्र, विष्कुंभ योग, करण किंस्तुन रहेगा। एक साल में 4 नवरात्र मानी जाती हैं। उनमें से दो गुप्त व दो उजागर नवरात्रि होती हैं। अश्विन मास की नवरात्रि सबसे खास नवरात्र मानी जाती है। इस नवरात्र में पूरे देश में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं। नाै दिन की साधना व देवी उपासना के बाद दशमी को दशहरा मनाया जाता है।

इस बार नवमी व दशहरा एक ही दिन
नवरात्रि के नौ दिन में देवी के नौ रूपों की स्तुति की जाती है। नवमी तिथी की समाप्ति रविवार सुबह 7.42 बजे हो जाएगी। इसके बाद दशमी लग जाएगी। इसलिए नवमी, विजयादशमी व अपराजिता पूजन इसी दिन किया जाएगा। कहने का आशय है कि नवमी व दशहरा का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा।

सूर्य, बुध के साथ होने से मिलेगा साधना का फल
ज्योतिर्विद पं. सिरोठिया का कहना है
कि इस बार नवरात्रि में ग्रहों की स्थिति ऐसी है कि इनमें की गई पूजा, अनुष्ठान सिद्धि सफल होंगे। तुला लग्न में सूर्य विराजित हैं। सूर्य लाभेश होकर तुला लग्न में बुध के साथ विराजित हैं। इस स्थिति में पूजा-पाठ अनुष्ठान, साधना की जाती है तो निश्चित ही पूर्ण सफलता धन्-धान्य सुख समृद्धि मिलने की मान्यता है। क्योंकि इस दौरान मकर राशि में शनि देव, सिंह राशि में शुक्र, वृश्चिक राशि में केतु, धनु राशि में गुरु, वृषभ राशि में राहु और मीन राशि में मंगल ग्रह विराजित हैं।

किस दिन किस देवी का पूजन करने से होगा लाभ प्रतिपदा 17 अक्टूबर : मां शैलपुत्री द्वितीया 18 अक्टूबर : मां ब्रह्मचारिणी तृतीया 19 अक्टूबर : मां चंद्रघंटा चतुर्थी 20 अक्टूबर : मां कुष्मांडा पंचमी 21 अक्टूबर : मां स्कंदमाता षष्टी 22 अक्टूबर : मां कात्यानी सप्तमी 23 अक्टूबर : मां कालरात्रि अष्टमी 24 अक्टूबर : मां महागौरी नवमी 25 अक्टूबर : सिद्धिदात्री घट स्थापना कर शुभ मुहूर्त सुबह 7.51 से 9.18 बजे तक दोपहर 1.40 से 4.04 बजे तक शाम 5.57 से 7.30 बजे तक रात 9.04 बजे से 12.10 बजे तक



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