दतिया9 घंटे पहले
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रतनगढ़ माता मंदिर के पट बंद होने के बाद भी आरती के वक्त सोमवार को दर्शनों के लिए पहुंची भीड़।
- 15 दिन बाद नवरात्र का मेला होगा, मौके पर तैयारी बिल्कुल नहीं, बाहर से आने वाले श्रद्धालु हो रहे बिना दर्शन वापस
देश में आस्था का केंद्र रतनगढ़ माता मंदिर को लेकर प्रशासन की बेरूखी श्रद्धालुओं के गुस्से की वजह बनती जा रही है। एक तरफ जहां देश भर में 21 सितम्बर के बाद मंदिरों को खोल दिया है, वहां रतनगढ़ माता मंदिर पर अभी भी ताला जड़ा हुआ है। शासन द्वारा मंदिर खुलने की सूचना प्रसारित होने के बाद से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना बड़ गया है, पर वहां बगैर दर्शन के ही उन्हें लौटाया जा रहा है।
खास बात यह है कि इस संबंध में चर्चा करने के लिए कलेक्टर संजय कुमार तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल सुनते ही फोन काट दिया। जबकि एसडीएम अनुराग निगवाल का कहना है कि मंदिर खुलने बंद होने का आदेश शासन की गाइड लाइन के बाद मंदिर सेवा समिति की बैठक में लिया जाएगा। वह बैठक होने पर अधिकारियों से चर्चा करेंगे।
सेंवढ़ा अनुभाग मेंं स्थित रतनगढ़ माता को लेकर समूचे बुंदेलखंड में गहरी आस्था है। वैसे तो यहां दीपावली की दौज को लख्खी मेले का आयोजन होता है पर नवरात्र के दौरान भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते है। सोमवार को लगने वाले साप्ताहिक मेले में 25-30 हजार लोग देश भर से आते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर को बंद किया गया था।
मंदिर को खोलने की गाइड लाइन आने के बाद प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली। चूंकि मंदिर जंगल के बीचों बीच स्थित है। इसके खुलने बंद होने जैसे निर्णयों की जानकारी आमआदमी तक पहंुचे, इसके लिए कोई सुविधा भी नहीं है। ऐसे में 21 सितम्बर से जैसे ही देश भर के मंदिर खुले, तो श्रद्धालुओं ने यहां भी आना शुरू कर दिया। लेकिन मंदिर केवल आरती के दौरान 30 मिनट के लिए सुबह और इतने समय के लिए ही शाम को खुलता है। इसके बाद पट बंद हो जाते है।
ऐसे में सुबह शाम जो दर्शनार्थी संयोग से रहते हैं केवल वही दर्शन का लाभ प्राप्त करते है। शेष लोगों को बगैर दर्शन के ही लौटना पड़ रहा है। स्थानीय लोग भी अब इस मामले में आंदोलन की योजना बना रहे हैं। नवरात्र को लेकर भी अभी तक कोई व्यवस्था ही नहीं सामान्य तौर पर हर वर्ष शारदीय नवरात्र के एक माह पहले से ही मंदिर समिति द्वारा व्यवस्थाओं को बनाने के लिए न सिर्फ बैठकों का आयोजन कर योजना पर कार्य प्रांरभ करवा दिया जाता है।
पर इस बार मंदिर के पट बंद रहने से न तो यहां अधिकारी आते है और नहीं जनप्रतिनिधि। नतीजा यह हो रहा है कि 15 दिन शेष रहने के बाद भी शारदीय नवरात्र को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। एनवक्त पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना भी संभव नहीं होगा। यहां बता दें कि पूर्व में 2006 एवं 2013 में इसी शारदीय नवरात्र की नवमी पर दो बार हादसा हो चुका है जिनमें मंदिर की ओर जाने आने वाले 500 से अधिक लोगों की जान गई थी।